पापा बनने की खुशी या छुपा तनाव? नई रिसर्च में खुला पिताओं का सच

पिता बनने की खुशी अक्सर सभी के सामने होती है—पहली बार बच्चे को गोद में लेना, उसका पहला कदम देखना या परिवार के साथ नई जिम्मेदारियां निभाना। लेकिन हालिया रिसर्च में पता चला है कि पितृत्व सिर्फ खुशी ही नहीं लाता, बल्कि पुरुषों में मानसिक तनाव और दबाव भी काफी बढ़ा देता है।
रिसर्च के अनुसार, कई पिताओं में नींद की कमी, नौकरी और परिवार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती, वित्तीय चिंता और खुद के व्यक्तिगत समय की कमी के कारण तनाव के लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि इन भावनाओं पर चर्चा बहुत कम होती है क्योंकि समाज में पिता को ‘मजबूत और स्थिर’ दिखाने का दबाव रहता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि पिताओं के मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना परिवार के लिए भी असर डाल सकता है। लगातार तनाव के कारण पिताओं में चिड़चिड़ापन, ऊर्जा की कमी और चिंता जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए पिताओं के लिए भी सपोर्ट सिस्टम, खुलकर बातचीत और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि जिन पिताओं को पार्टनर या परिवार का सहयोग मिलता है, वे भावनात्मक रूप से ज्यादा संतुलित रहते हैं। इस बात से यह स्पष्ट होता है कि पिता होने के साथ-साथ अपने मन की भावनाओं को समझना और साझा करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना बच्चे की परवरिश करना।
पितृत्व केवल खुशी का नाम नहीं है; इसके साथ जिम्मेदारी और मानसिक तनाव भी जुड़ा होता है। पिता बनने वाले पुरुषों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी भावनाओं को दबाएं नहीं, बल्कि खुलकर साझा करें और समय-समय पर खुद की मानसिक देखभाल करें।



