
मनन कुमार मिश्रा कौन हैं? यह सवाल इन दिनों इसलिए चर्चा में है क्योंकि NALSAR University of Law से जुड़े विवाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन की भूमिका सुर्खियों में आ गई है। मनन कुमार मिश्रा वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और लंबे समय से BCI का नेतृत्व कर रहे हैं। वह बिहार से राज्यसभा सांसद भी हैं।
NALSAR विवाद की शुरुआत विश्वविद्यालय के 2026 दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर छात्रों के विरोध से हुई। कुछ छात्रों ने CJI को चीफ गेस्ट बनाए जाने पर आपत्ति जताई और इसके बाद मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा।
इसके बाद BCI ने एक सख्त कदम उठाते हुए राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का अधिवक्ता के तौर पर नामांकन फिलहाल न किया जाए। इस फैसले से पूरे कानूनी समुदाय में बहस छिड़ गई, क्योंकि कार्रवाई का असर पूरे बैच पर पड़ रहा था।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा तो CJI सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों का विरोध उनके और छात्रों के बीच का मामला है और BCI को इसमें हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए। कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए BCI से जवाब भी मांगा।
सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति और व्यापक प्रतिक्रिया के बाद BCI ने अपने शुरुआती फैसले से पीछे हटते हुए NALSAR के पूरे 2026 बैच को बार काउंसिलों में नामांकन की अनुमति दे दी। इसके बाद मनन कुमार मिश्रा के नेतृत्व वाली BCI ने आगे की कार्रवाई को लेकर भी अपना रुख बदला।
मनन कुमार मिश्रा इससे पहले भी BCI के फैसलों और बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। जुलाई 2026 में उन्होंने छात्र प्रदर्शनों को लेकर एक सार्वजनिक अपील जारी की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ विरोध प्रदर्शनों को असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्व प्रभावित कर रहे हैं। इस बयान पर भी कानूनी समुदाय के एक वर्ग ने सवाल उठाए थे।
वह BCI के जरिए न्यायपालिका और वकीलों से जुड़े संस्थागत मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं। मई 2026 में BCI चेयरमैन के तौर पर उन्होंने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के एक जज के आचरण को लेकर CJI को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी।
फिलहाल NALSAR विवाद ने BCI की शक्तियों, छात्रों के विरोध के अधिकार और शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। शुरुआती नामांकन रोकने का फैसला वापस लिया जा चुका है और ताजा घटनाक्रम में BCI ने छात्रों के खिलाफ जांच भी खत्म करने का निर्णय लिया है।
कुल मिलाकर, मनन कुमार मिश्रा इस समय सिर्फ BCI चेयरमैन के तौर पर नहीं, बल्कि CJI-NALSAR विवाद के प्रमुख किरदार के रूप में राष्ट्रीय चर्चा में हैं। यह मामला आने वाले दिनों में BCI की भूमिका और उसकी नियामकीय शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर सकता है।



