संसद में दो-तिहाई बहुमत से कितनी दूर है NDA? जानिए बीजेपी की बढ़ती ताकत का गणित

संसद में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बढ़ती संख्या ने एक बार फिर दो-तिहाई बहुमत के गणित को सुर्खियों में ला दिया है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और राज्यसभा में नए सदस्यों के शपथ लेने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों, विशेषकर संवैधानिक संशोधनों से जुड़े प्रस्तावों पर पहले की तुलना में अधिक रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
हालांकि, किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसमें उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ-साथ सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत भी शामिल होता है। ऐसे में, भले ही एनडीए की स्थिति मजबूत हुई हो, लेकिन अंतिम सफलता सदन में वास्तविक उपस्थिति, सहयोगी दलों के समर्थन और मतदान के समय उपलब्ध संख्या पर भी निर्भर करेगी। यही वजह है कि संसद के मौजूदा आंकड़ों और सहयोगी दलों की भूमिका पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।



