NCPCR Guidelines: नशा मुक्ति केंद्रों में बच्चों के लिए अलग वार्ड, NCPCR की बड़ी सिफारिश

बच्चों में बढ़ती नशे की समस्या और उनके पुनर्वास को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। NCPCR ने नशा मुक्ति केंद्रों में बच्चों के लिए अलग और सुरक्षित उपचार व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश की है। आयोग का जोर इस बात पर है कि नाबालिगों को वयस्क मरीजों के साथ रखने के बजाय उनकी उम्र और जरूरत के अनुरूप वातावरण दिया जाए।
बच्चों के लिए अलग वार्ड की सिफारिश
NCPCR के प्रस्ताव में राज्यों से नशा मुक्ति केंद्रों में बच्चों के लिए विशेष बाल-अनुकूल वार्ड और बेड आरक्षित करने की बात कही गई है। जहां अलग वार्ड की व्यवस्था तत्काल संभव नहीं है, वहां बच्चों के लिए निर्धारित समय में अलग उपचार सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है।
वयस्क मरीजों से अलग रखना क्यों जरूरी?
आयोग का मानना है कि बच्चों की जरूरतें और मनोवैज्ञानिक परिस्थितियां वयस्कों से अलग होती हैं। इसलिए उपचार के दौरान उन्हें वयस्क मरीजों से अलग रखना उनके लिए अधिक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार करने में मदद कर सकता है। मौजूदा साझा केंद्रों में भी बच्चों को अलग रखने की व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव है।
उपचार के साथ पुनर्वास पर जोर
बच्चों के नशा मुक्ति उपचार को केवल दवा या चिकित्सकीय प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और पुनर्वास से जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। कम उम्र में नशे की समस्या सामने आने पर परिवार और स्कूल की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
स्कूलों में बनेंगे ‘प्रहरी क्लब’
NCPCR के प्रस्ताव में स्कूलों में ‘प्रहरी क्लब’ स्थापित करने की सिफारिश भी की गई है। इन क्लबों का उद्देश्य बच्चों में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाना और शुरुआती स्तर पर जोखिम की पहचान में मदद करना है।
बच्चों की पहचान और मदद पर फोकस
नशे की समस्या से जूझ रहे बच्चों की समय रहते पहचान और उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। स्कूल, परिवार, स्वास्थ्यकर्मी और स्थानीय प्रशासन मिलकर ऐसे बच्चों को उपचार और परामर्श सेवाओं से जोड़ सकते हैं।
बाल अधिकारों की सुरक्षा
नशे की लत से प्रभावित बच्चे केवल मरीज नहीं होते, बल्कि उन्हें विशेष देखभाल और संरक्षण की जरूरत भी होती है। इसलिए उपचार केंद्रों में उनकी निजता, सुरक्षा, सम्मान और उम्र के अनुरूप देखभाल सुनिश्चित करना बाल अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
राज्यों की भूमिका अहम
NCPCR की सिफारिशों को लागू करने में राज्य सरकारों और संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए मौजूदा नशा मुक्ति केंद्रों में अलग सुविधाएं विकसित करने के साथ प्रशिक्षित कर्मचारियों और बाल-केंद्रित परामर्श व्यवस्था की जरूरत होगी।
केंद्र सरकार की नशा मांग में कमी लाने की राष्ट्रीय योजना के तहत भी नशे से प्रभावित लोगों के उपचार, परामर्श और पुनर्वास पर काम किया जाता है। बच्चों के लिए अलग व्यवस्था इस प्रयास को अधिक संवेदनशील और उम्र-विशेष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
NCPCR की इन सिफारिशों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को नशे की समस्या से बाहर निकालते समय उन्हें सुरक्षित, बाल-अनुकूल और सम्मानजनक माहौल उपलब्ध कराना है। अलग वार्ड और बेड के साथ स्कूल स्तर पर जागरूकता बढ़ाने वाले ‘प्रहरी क्लब’ जैसे कदम नशे की रोकथाम और समय पर हस्तक्षेप में मददगार साबित हो सकते हैं।



