Pakistan-Houthis: हूतियों को पाकिस्तान की चेतावनी, ‘एक पर हमला तो सब पर अटैक’

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब पर हूती हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। ताजा हमलों के बाद पाकिस्तान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सऊदी अरब की सुरक्षा को खतरा बढ़ने पर वह अपने नए रक्षा समझौते के तहत कार्रवाई के लिए बाध्य हो सकता है।
‘एक पर हमला, सब पर हमला’ का सिद्धांत
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर हमला सभी पर हमले के तौर पर माना जाएगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए।
क्या है मक्का डिफेंस अलायंस?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार यह समझौता रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य बाहरी आक्रमण के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध क्षमता मजबूत करना है।
हूती हमलों के बाद क्यों बढ़ी चिंता?
हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी सऊदी अरब के कई शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। सऊदी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में 73 लोग घायल हुए। हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
क्या तुरंत सक्रिय होगा मक्का पैक्ट?
पाकिस्तान की चेतावनी से यह संकेत जरूर मिला है कि समझौते के प्रावधान लागू किए जा सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान तुरंत सैन्य कार्रवाई शुरू कर देगा। ख्वाजा आसिफ ने खुद कहा कि समझौता आक्रामक प्रकृति का नहीं है और हर हमले का जवाब सीधे सैन्य हमले से देना जरूरी नहीं होगा।
पाकिस्तान की दुविधा भी कम नहीं
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान के सामने संतुलन की चुनौती है। एक ओर उसके सऊदी अरब के साथ रणनीतिक और रक्षा संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर हूतियों के पीछे ईरान का समर्थन माना जाता है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए सीधे सैन्य हस्तक्षेप का फैसला क्षेत्रीय समीकरणों को और जटिल कर सकता है।
सऊदी अरब के लिए पाकिस्तान का समर्थन
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हूती हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सऊदी अरब की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति समर्थन दोहराया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी हमलों को सऊदी क्षेत्र और नागरिक व आर्थिक प्रतिष्ठानों के लिए गंभीर खतरा बताया।
क्या युद्ध का दायरा बढ़ सकता है?
अगर हूती हमले लगातार सऊदी क्षेत्र में होते रहे और संघर्ष यमन की सीमाओं से बाहर फैलता है, तो मक्का समझौते की सामूहिक रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये को संयुक्त रणनीति तय करनी पड़ सकती है।
असली परीक्षा कूटनीति की
फिलहाल पाकिस्तान की प्राथमिकता संघर्ष को और फैलने से रोकने की दिखाई देती है। रक्षा मंत्री ने भी उम्मीद जताई है कि स्थिति नियंत्रण में आएगी। इसलिए मक्का समझौता सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ एक रणनीतिक प्रतिरोध और कूटनीतिक संदेश के तौर पर भी काम कर सकता है।
कुल मिलाकर सऊदी अरब पर हूती हमलों ने पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये के नए रक्षा समझौते को पहली बड़ी क्षेत्रीय परीक्षा के सामने ला दिया है। पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि सऊदी अरब पर बाहरी आक्रमण की स्थिति में वह अपने समझौते के दायित्वों को नजरअंदाज नहीं करेगा। हालांकि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मक्का डिफेंस अलायंस सैन्य रूप से सक्रिय होगा या इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रतिरोध और कूटनीतिक दबाव के लिए किया जाएगा।



