NHAI की 26 परियोजनाओं पर खतरा, AI डेटा में गड़बड़ी की जांच

देश में हाईवे निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर NHAI ने AI आधारित तकनीक का सहारा लिया है, लेकिन अब इसी तकनीक के डेटा में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। इससे NHAI की 26 परियोजनाओं पर जांच का खतरा मंडरा रहा है।
AI-MC यानी Automated and Intelligent Machine-Aided Construction तकनीक का इस्तेमाल सड़क निर्माण के दौरान मशीनों से रियल-टाइम डेटा हासिल करने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य निर्माण की गुणवत्ता, लेवल और अन्य मानकों की लगातार निगरानी करना है।
आरोप है कि कुछ ठेकेदारों ने इस तकनीक से तैयार होने वाले डेटा में बदलाव करने की कोशिश की। यदि जांच में डेटा से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है, तो इससे निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का मामला इस पूरे विवाद के केंद्र में है। एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में निर्माण के बाद स्लिपेज सामने आया था। NHAI ने इसके बाद तकनीकी आकलन के साथ जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सामने आई समस्या ने AI-MC तकनीक से जुड़े दावों और वास्तविक निर्माण गुणवत्ता की जांच की जरूरत बढ़ा दी है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार प्रभावित हिस्से की समस्या डिजाइन से जुड़ी हो सकती है और केवल ऊपरी मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी।
NHAI ने अब हाईवे परियोजनाओं में AI-MC के इस्तेमाल को व्यापक बनाने का फैसला किया है। 20 किलोमीटर से अधिक लंबी और 500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाली परियोजनाओं में इस तकनीक को अनिवार्य किया गया है। इसका मकसद निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
ऐसे में AI डेटा की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर मशीन से हासिल रियल-टाइम जानकारी में बदलाव किया जा सके, तो तकनीक आधारित निगरानी का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए डेटा की सुरक्षा, ऑडिट और स्वतंत्र सत्यापन की व्यवस्था पर जोर देना जरूरी होगा।
26 परियोजनाओं की संभावित जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि AI-MC डेटा में गड़बड़ी किसी एक परियोजना तक सीमित है या यह व्यापक समस्या है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की जांच के नतीजे भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
NHAI के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकार हाईवे निर्माण में तकनीक के जरिए गुणवत्ता सुधारने पर जोर दे रही है। यदि AI आधारित निगरानी व्यवस्था को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जाता है, तो इससे भविष्य की बड़ी सड़क परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण संभव हो सकता है।



