
चैत्र पूर्णिमा 2026 हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा मानी जाती है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन स्नान-दान और पूजा-पाठ करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने से सभी पापों का नाश होता है।
चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा की जाती है। स्नान-दान का शुभ मुहूर्त प्रातः काल से लेकर मध्याह्न तक माना जाता है, इस दौरान किया गया दान कई गुना फलदायी होता है।
इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन उपवास करते हैं और रात में चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलते हैं। साथ ही, गरीबों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
ध्यान रखें कि इस दिन तामसिक भोजन से दूर रहें और मन, वचन व कर्म से शुद्धता बनाए रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही विधि और श्रद्धा से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति का संचार करती है।



