उत्तर प्रदेशलखनऊ

बाबा साहब ने संविधान देकर भारत का नाम देश दुनिया में रोशन किया : मायावती

डॉ. भीमराव अंबेडकर के 67वें परिनिर्वाण दिवस पर देशभर में आयोजन किया जा रहा है। बसपा प्रमुख मायावती ने कार्यालय में स्थापित भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जिसके बाद मायावती ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हर मामले में बेहतरीन संविधान देकर भारत का नाम देश-दुनिया में जो रोशन किया। वह अनमोल है। देश उनका सदा आभारी रहेगा।

डॉ अम्बेडकर की पुण्यतिथि पर क्यों मनाया जाता परिनिर्वाण दिवस?

हर साल 6 दिसंबर को डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए उनकी पुण्यतिथि पर महापरिनिर्वाण दिवस मनाया जाता है। डॉक्टर भीमराव रामजी अम्बेडकर, जिन्हें हम सब डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर के नाम से भी जानते हैं। डॉक्टर अम्बेडकर को संविधान का जनक कहा जाता है। हर साल 6 दिसंबर के दिन को बाबा साहेब की पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

परिनिर्वाण दिवस क्यों मनाया जाता?

परिनिर्वाण का अर्थ है ‘मृत्यु पश्चात निर्वाण’ यानी मौत के बाद निर्वाण। परिनिर्वाण बौद्ध धर्म के कई प्रमुख सिद्धांतों और लक्ष्यों में एक है। इसके अनुसार, जो व्यक्ति निर्वाण करता है। वह सांसारिक मोह माया, इच्छा और जीवन की पीड़ा से मुक्त रहता है। साथ ही वह जीवन चक्र से भी मुक्त रहता है। लेकिन निर्वाण को हासिल करना आसान नहीं होता है। इसके लिए सदाचारी और धर्म सम्मत जीवन व्यतीत करना पड़ता है। बौद्ध धर्म में 80 वर्ष में भगवान बुद्ध के निधन को महापरिनिर्वान कहा जाता है।

कौन थे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर?

डॉ. अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के छोटे से गांव महू में हुआ था। उनका परिवार मराठी था और मूल रूप से महाराष्‍ट्र के रत्‍नागिरी जिले के आंबडवे गांव से था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। वे अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान थे।

बाबा साहब का जन्म महार जाति में हुआ था जिसे लोग अछूत और निचली जाति मानते थे। अपनी जाति के कारण उन्हें सामाजिक दुराव का सामना करना पड़ा। प्रतिभाशाली होने के बावजूद स्कूल में उनको अस्पृश्यता के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

अंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में एक औपचारिक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया। इस समारोह में उन्‍होंने श्रीलंका के महान बौद्ध भिक्षु महत्थवीर चंद्रमणी से पारंपरिक तरीके से त्रिरत्न और पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म को अपना लिया। अंबेडकर को डायबिटीज के मरीज थे। 6 दिसंबर 1956 को दिल्‍ली में उनका निधन हो गया था।

कांग्रेस, बीजेपी समेत तमाम राजनैतिक दल करते है याद

भारतीय संविधान के निर्माता, समाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर की आज शुक्रवार को 63वीं पुण्यतिथि है। बाबा साहेब अंबेडकर ने छह दिसंबर 1956 को अंतिम सांस ली थी। आज के दिन ‘परिनिर्वाण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। अंबेडकर दलित वर्ग को समानता दिलाने के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे। वे दलित समुदाय के लिए एक ऐसी अलग राजनैतिक पहचान की वकालत करते रहे। देश में डॉ. अंबेडकर की याद में कई कार्यक्रम किए जाते हैं। बसपा से लेकर कांग्रेस, बीजेपी सहित तमाम राजनीतिक दल परिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं।

मायावती का ट्वीट

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