अलकनंदा बेसिन में मिले 219 हैंगिंग ग्लेशियर, बढ़ा खतरे का संकेत

उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने अलकनंदा बेसिन में 219 हैंगिंग ग्लेशियरों की पहचान की है। इन ग्लेशियरों की स्थिति को लेकर विशेषज्ञों ने सतर्कता बरतने की जरूरत बताई है। ऊंची पहाड़ियों पर लटके हुए ये ग्लेशियर प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं।
हैंगिंग ग्लेशियर ऐसे हिमखंड होते हैं जो पहाड़ों की ढलानों पर अस्थिर स्थिति में टिके रहते हैं। तापमान में बढ़ोतरी, जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की प्रक्रिया इनके संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी बड़े हैंगिंग ग्लेशियर का हिस्सा टूटकर नीचे गिरता है, तो इससे मलबा, बर्फ और पानी का तेज बहाव पैदा हो सकता है। इसका असर नदियों के प्रवाह, आसपास के क्षेत्रों और बुनियादी ढांचे पर पड़ सकता है।
अलकनंदा बेसिन उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण नदी क्षेत्रों में से एक है, जहां कई धार्मिक स्थल, गांव और जलविद्युत परियोजनाएं स्थित हैं। ऐसे में ग्लेशियरों की नियमित निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बीच हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों की स्थिति पर लगातार शोध किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि समय रहते निगरानी, चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन की तैयारी से संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।



