चमोली टनल हादसा: सात की मौत, तीन अब भी लापता

उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की सुरंग में भारी मात्रा में पानी और मलबा आने के बाद मजदूर अंदर फंस गए थे। हादसे में अब तक सात मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि तीन मजदूरों की तलाश अभी भी जारी है।
घटना के बाद राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। टनल के अंदर पानी का रिसाव और मलबा होने के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बचाव दल लगातार लापता मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को घटनास्थल का जायजा लिया और अस्पताल पहुंचकर घायल श्रमिकों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान में पूरी ताकत लगाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने हादसे के कारणों की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए हैं।
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों के लिए राज्य सरकार ने आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये देने की बात कही है। वहीं, घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों को आवश्यक मदद उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता उन तीन मजदूरों को लेकर है, जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है। रिपोर्ट के अनुसार, लापता श्रमिकों में झारखंड और छत्तीसगढ़ के मजदूर शामिल हैं। उनके परिवार लगातार अपनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं।
इस दुर्घटना ने निर्माणाधीन सुरंगों में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खास बात यह है कि इसी परियोजना की सुरंग में दिसंबर 2025 में भी लोको ट्रॉलियों की टक्कर की दुर्घटना हुई थी। लगातार दूसरी घटना के बाद सुरक्षा मानकों और जोखिम प्रबंधन की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान लापता मजदूरों को खोजने और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने पर है। मुख्यमंत्री ने भी राहत कार्य में किसी तरह की कमी न रहने देने के निर्देश दिए हैं। अब सभी की नजर रेस्क्यू अभियान पर है और परिवार अपने लापता परिजनों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।



