चमोली टनल हादसा: दिसंबर 2025 में भी हुआ था बड़ा हादसा

उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन टनल में हुए ताजा हादसे ने एक बार फिर पहाड़ों में सुरंग निर्माण के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना ऐसे समय हुई है जब इसी इलाके में पहले भी सुरंग से जुड़ी दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ताजा हादसे की वजह से राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
इससे पहले दिसंबर 2025 में विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में दो लोको वैगन आपस में टकरा गए थे। घटना के वक्त सुरंग के अंदर बड़ी संख्या में अधिकारी और श्रमिक मौजूद थे। हादसे के बाद कई कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक घायलों की संख्या 60 से 70 के बीच बताई गई थी।
दिसंबर की दुर्घटना में एक लोको वैगन श्रमिकों को लेकर सुरंग के भीतर जा रहा था, जबकि दूसरा वैगन निर्माण सामग्री से जुड़ा था। बाद की जांच में सामने आया कि खड़े किए गए वैगन के अपने आप नीचे की ओर चलने से टक्कर हुई थी। इस मामले में जनवरी 2026 में मजिस्ट्रेटी जांच शुरू की गई थी।
यह पिछली घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरंग निर्माण जैसे संवेदनशील काम में छोटी सी तकनीकी या संचालन संबंधी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। दिसंबर की दुर्घटना के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल, परिवहन व्यवस्था और निगरानी तंत्र की समीक्षा को लेकर सवाल उठे थे।
अब ताजा हादसे के बाद एक बार फिर यह सवाल सामने है कि पिछली दुर्घटना से कितनी सीख ली गई और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए। चमोली जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान आपदा प्रबंधन और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है।
चमोली की घटना ने वर्ष 2023 के सिल्क्यारा सुरंग हादसे की याद भी ताजा कर दी है। इसके बाद भी उत्तराखंड में सुरंगों और निर्माणाधीन परियोजनाओं में दुर्घटनाओं का सिलसिला चिंता बढ़ाता है। जुलाई 2026 में सिल्क्यारा टनल में कंक्रीट ब्लॉक गिरने से एक मजदूर की मौत की घटना भी सामने आई थी।
ऐसे में ताजा चमोली हादसा केवल राहत और बचाव तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि निर्माणाधीन सुरंगों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा और जवाबदेही का सवाल भी खड़ा करता है। आने वाले समय में जांच से यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से कदम उठाए जाएंगे।



