उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को जिला समितियां गठित

उत्तराखंड में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए सरकार ने जिला स्तर पर नई व्यवस्था की है। 25 सितंबर 2026 को जिला स्तरीय मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण एवं प्रबंधन समितियों के गठन का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य वन्यजीवों की आवाजाही वाले संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को मजबूत करना और घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों को एक साथ लाना है।
इन समितियों के माध्यम से वन विभाग, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा। वन्यजीवों के हमले या अन्य आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई, प्रभावित परिवारों को राहत और मुआवजे की प्रक्रिया में तेजी लाना भी इस पहल के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए रोकथाम से जुड़े उपायों पर ध्यान दिया जाएगा।
उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता सरकारी आंकड़ों से भी सामने आती है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से 30 सितंबर 2026 के बीच वन्यजीवों से जुड़ी घटनाओं में 55 लोगों की मौत हुई और 407 लोग घायल हुए। इस अवधि में गुलदार के हमलों में सबसे अधिक 17 लोगों की जान गई, जबकि बाघ के हमलों में 12 लोगों की मौत दर्ज की गई।
पहाड़ी और वन क्षेत्रों के आसपास बसे गांवों में लोगों की सुरक्षा के लिए निगरानी, संवेदनशील स्थानों की पहचान, त्वरित प्रतिक्रिया दलों की सक्रियता और जनजागरूकता जैसे उपाय महत्वपूर्ण हैं। जिला स्तरीय समितियों के जरिए इन प्रयासों को समन्वित करने और प्रभावित क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार कदम उठाने की अपेक्षा है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके गलियारों का संरक्षण भी जरूरी है। सरकार की पहल का उद्देश्य लोगों की जान-माल की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है। समितियों की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्थानीय स्तर पर निगरानी, आपात कार्रवाई और राहत व्यवस्था कितनी तेजी से लागू होती है।



