दयारा बुग्याल में दूध-मक्खन की होली, पर्यटकों ने भी लिया आनंद

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल सोमवार को अनोखे लोक उत्सव का गवाह बना। करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर पारंपरिक अंढूड़ी उत्सव यानी बटर फेस्टिवल धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे पर्यटकों ने भी उत्सव में भाग लिया। इस पर्व की सबसे खास बात दूध, दही, मट्ठा और मक्खन से खेली जाने वाली होली है। सामान्य होली की तरह यहां रंग और गुलाल का इस्तेमाल नहीं होता। ग्रामीण और पर्यटक एक-दूसरे पर दूध और मक्खन लगाकर इस पारंपरिक पर्व की खुशियां साझा करते हैं।
अंढूड़ी उत्सव को प्रकृति और पशुधन के प्रति आभार प्रकट करने की परंपरा से जोड़ा जाता है। गर्मियों के दौरान ग्रामीण अपने मवेशियों के साथ दयारा बुग्याल की छानियों में रहते हैं। यहां पशुओं के दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होती है और इसी समृद्धि के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए यह उत्सव मनाया जाता है। उत्सव में रैथल, नटीण, बंद्राणी, क्यार्क और भटवाड़ी समेत पंचगाई पट्टी के ग्रामीण अपने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के साथ दयारा बुग्याल पहुंचे। धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के बाद दूध-मक्खन की होली खेली गई।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य और धार्मिक परंपराओं ने माहौल को और खास बना दिया। रासौ-तांदी नृत्य की प्रस्तुति ने उत्सव में पहुंचे लोगों का ध्यान आकर्षित किया और उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। दयारा बुग्याल का यह उत्सव स्थानीय संस्कृति के साथ-साथ पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। अनोखी परंपरा और प्राकृतिक खूबसूरती के कारण हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इससे क्षेत्र में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं भी मजबूत होती हैं।
अंढूड़ी उत्सव केवल मनोरंजन का पर्व नहीं है, बल्कि यह पहाड़ के लोगों की प्रकृति, देव परंपरा और पशुधन से जुड़ी जीवनशैली को दर्शाता है। बदलते समय के बावजूद ग्रामीणों ने इस परंपरा को जीवित रखा है, जिससे नई पीढ़ी को भी अपनी लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है। दयारा बुग्याल में आयोजित दूध-मक्खन की होली ने एक बार फिर उत्तराखंड की अनूठी सांस्कृतिक विरासत को सामने रखा। बारिश के बीच भी ग्रामीणों और पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ और पारंपरिक अंढूड़ी उत्सव उल्लास के साथ संपन्न हुआ।



