Sam Altman का कबूलनामा: AI का असर उम्मीद से धीमा, इंसानी आदतें नहीं बदल रहीं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया में जितनी तेजी से बदलाव की उम्मीद की जा रही थी, उसकी रफ्तार को लेकर OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने बड़ा कबूलनामा किया है। उन्होंने माना कि AI के कारण कारोबार और अर्थव्यवस्था में बदलाव कितनी जल्दी आएगा, इसका उन्होंने गलत अनुमान लगाया था। ऑल्टमैन के मुताबिक तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन लोग और कंपनियां अपनी पुरानी आदतों और काम करने के तरीकों को उतनी तेजी से नहीं बदल रहे हैं।
GPT-4 के 2023 में आने के बाद ऑल्टमैन को उम्मीद थी कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। हालांकि, वास्तविक दुनिया में AI को अपनाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही। इसका मतलब यह नहीं है कि AI का असर कम होगा, बल्कि इसका प्रभाव लंबे समय में धीरे-धीरे बढ़ सकता है।
ऑल्टमैन की यह स्वीकारोक्ति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि AI इंडस्ट्री में तकनीकी क्षमता और उसके वास्तविक आर्थिक असर के बीच अंतर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। कंपनियों को सिर्फ बेहतर AI मॉडल उपलब्ध होने से ही अपनी पूरी कार्यप्रणाली बदलने में सफलता नहीं मिलती; इसके लिए कर्मचारियों, प्रक्रियाओं और ग्राहकों की आदतों में भी बदलाव जरूरी होता है।
रोजगार को लेकर भी ऑल्टमैन का रुख पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क नजर आया है। मई 2026 में उन्होंने कहा था कि AI से तत्काल बड़े पैमाने पर ‘jobs apocalypse’ जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका अब कम दिखती है और तकनीक ने अभी उतनी सफेदपोश नौकरियां खत्म नहीं की हैं, जितनी पहले आशंका थी।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि AI का रोजगार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव खत्म हो गया है। बल्कि संकेत यह है कि बदलाव की प्रक्रिया उम्मीद से अधिक जटिल और लंबी हो सकती है। AI की क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उसे रोजमर्रा के काम, कंपनियों और समाज में बड़े पैमाने पर अपनाने में मानवीय व्यवहार और संस्थागत बदलाव बड़ी भूमिका निभाएंगे।



