तुर्किए का नया TB2 ड्रोन बना हथियारों का कैरियर, 16 आत्मघाती ड्रोन लेकर भरी उड़ान

तुर्किए ने अपनी सैन्य ताकत और ड्रोन तकनीक को मजबूत करने की दिशा में एक नई उपलब्धि हासिल की है। देश की रक्षा कंपनी Baykar ने अपने चर्चित Bayraktar TB2 मानवरहित लड़ाकू विमान का नया परीक्षण किया है। इस परीक्षण में TB2 ड्रोन ने अपने साथ 16 Skydagger FPV आत्मघाती ड्रोन लेकर उड़ान भरी। खास बात यह है कि बड़े ड्रोन से हवा में छोटे ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता भी प्रदर्शित की गई। परीक्षण के दौरान दो FPV ड्रोन छोड़े गए, जिन्होंने अपने निर्धारित लक्ष्यों पर सटीक निशाना लगाया।
इस परीक्षण को आधुनिक युद्ध तकनीक के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक Bayraktar TB2 का इस्तेमाल मुख्य रूप से निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और निर्देशित हथियारों से हमला करने के लिए किया जाता रहा है। नई तकनीक के बाद यह छोटे हमलावर ड्रोन्स को अपने साथ ले जाने और उन्हें हवा से लॉन्च करने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में भी काम कर सकेगा।
इस नई व्यवस्था में TB2 के दोनों पंखों के नीचे विशेष लॉन्च सिस्टम लगाया गया है। इसके माध्यम से कुल 16 Skydagger FPV ड्रोन ले जाए जा सकते हैं। परीक्षण के दौरान विमान ने उड़ान भरने के बाद निर्धारित क्षेत्र में पहुंचकर दो ड्रोन लॉन्च किए। ये छोटे ड्रोन अपने कैमरों की मदद से लक्ष्य तक पहुंचे और सफलतापूर्वक निशाना साधा।
TB2 बनेगा छोटे ड्रोन्स का मदरशिप
इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि Bayraktar TB2 केवल छोटे ड्रोन्स को ले जाने का काम नहीं करेगा, बल्कि उनके लिए हवा में संचार माध्यम (Communication Relay) की भूमिका भी निभाएगा। यानी जमीन पर मौजूद ऑपरेटर TB2 के जरिए छोटे ड्रोन्स को नियंत्रित कर सकेंगे। इससे छोटे FPV ड्रोन्स की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
युद्ध के मैदान में बदल सकती है ड्रोन की भूमिका
आधुनिक युद्धों में छोटे FPV ड्रोन्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इनकी मदद से कम लागत में दुश्मन के ठिकानों और सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि, इन ड्रोन्स की एक बड़ी सीमा उनकी संचार दूरी होती है। TB2 जैसे बड़े ड्रोन को मदरशिप के रूप में इस्तेमाल करने से इस चुनौती को कम करने की संभावना है।
तुर्किए का यह परीक्षण दिखाता है कि आने वाले समय में बड़े और छोटे मानवरहित विमानों को एक साथ इस्तेमाल करने की तकनीक रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि, फिलहाल यह एक परीक्षण है और इसके वास्तविक युद्धक इस्तेमाल तथा ऑपरेशनल क्षमता को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।



