Ethanol Production: क्या महंगा हो रहा खाना? चीनी-चावल पर असर

भारत में पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट बढ़ाने की नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा करना है। लेकिन अब यही नीति खाद्य कीमतों को लेकर नई बहस खड़ी कर रही है। खासकर चीनी, चावल और मक्का जैसे उत्पादों को इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किए जाने से खाद्य उपलब्धता और कीमतों पर संभावित असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा फिलहाल चीनी की कीमतों को लेकर है। अगस्त 2026 में देश के कई हिस्सों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। कोल्हापुर के थोक बाजार में कीमत करीब 20 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई, जबकि सरकार घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए आयात और स्टॉक से जुड़े विकल्पों पर विचार कर रही है।
इसका एक कारण गन्ने का एक हिस्सा चीनी के बजाय इथेनॉल उत्पादन की ओर जाना भी माना जा रहा है। जब गन्ने या उससे बनने वाले उत्पादों का इस्तेमाल ईंधन के लिए बढ़ता है, तो चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध मात्रा प्रभावित हो सकती है। हालांकि चीनी की मौजूदा तेजी के पीछे कम उत्पादन, मौसम और त्योहारी मांग जैसे कई दूसरे कारण भी हैं। इसलिए केवल इथेनॉल नीति को ही कीमत बढ़ने की एकमात्र वजह मानना सही नहीं होगा।
चावल के मामले में भी तस्वीर कुछ अलग है। भारत में इथेनॉल के लिए टूटे चावल और अतिरिक्त खाद्यान्न का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार का कहना है कि पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्य सुरक्षा योजनाओं और बफर स्टॉक की जरूरतें पूरी की जाती हैं और उसके बाद ही अतिरिक्त स्टॉक को इथेनॉल उत्पादन के लिए मंजूरी दी जाती है।
इसके बावजूद अर्थशास्त्रियों और कृषि विशेषज्ञों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि अगर अनाज आधारित इथेनॉल का इस्तेमाल लगातार बढ़ता है, तो इसका असर खाद्य बाजार और पशु चारे की कीमतों पर कितना पड़ेगा। Economic Survey ने भी इथेनॉल नीति के साथ खाद्य सुरक्षा और फसल पैटर्न से जुड़े संभावित trade-offs की ओर ध्यान दिलाया है।
मक्का भी इस बहस का अहम हिस्सा है। इथेनॉल के लिए मक्के की मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है, लेकिन दूसरी ओर यही फसल पोल्ट्री और पशु आहार उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में ईंधन और खाद्य/फीड की मांग के बीच संतुलन बनाना नीति निर्माताओं के लिए चुनौती बन सकता है।
भारत ने 2026 में E20 पेट्रोल को देशभर में लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार का तर्क है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से तेल आयात में कमी और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलती है। वहीं मौजूदा चीनी कीमतों के बीच सरकार के सामने चुनौती यह है कि ईंधन नीति के फायदे बनाए रखते हुए घरेलू खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में कैसे रखा जाए।
मुख्य बातें:
- E20 के कारण इथेनॉल की मांग में बढ़ोतरी हुई है।
- गन्ना, मक्का और कुछ अनाज इथेनॉल के प्रमुख फीडस्टॉक हैं।
- चीनी की कीमतों में हाल में तेज बढ़ोतरी हुई है।
- सरकार का कहना है कि खाद्य सुरक्षा की जरूरतें पहले पूरी की जाती हैं।
- अनाज आधारित इथेनॉल से खाद्य और पशु चारे की कीमतों पर संभावित दबाव की बहस जारी है।
- चुनौती ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की है।



