सोने-चांदी में तेजी बरकरार, क्या आगे भी बढ़ेंगे दाम? जानें किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर

अगस्त 2026 में सोने और चांदी ने एक बार फिर मजबूती दिखाई है। हालिया सप्ताह में MCX पर सोना 5% से अधिक और चांदी करीब 4.5% चढ़ी। ऐसे में सवाल है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का रुख फिलहाल सकारात्मक है, लेकिन ऊंची कीमतों पर अचानक मुनाफावसूली का जोखिम भी बना हुआ है।
सोने की तेजी के पीछे क्या वजह है?
सोने को अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर उम्मीदों ने हाल में इसकी मांग को सहारा दिया है। Reuters के अनुसार अगस्त में सोने में करीब 9% की वापसी हुई और यह लगभग 4,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचा।
इसके अलावा अमेरिकी महंगाई में नरमी और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद भी सोने के लिए सकारात्मक मानी जा रही है। कम ब्याज दरों के माहौल में बिना ब्याज देने वाली परिसंपत्ति के तौर पर सोने की आकर्षकता बढ़ सकती है।
चांदी में क्यों बनी हुई है मजबूती?
चांदी की खासियत यह है कि इसमें निवेश के साथ औद्योगिक मांग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही कारण है कि इसकी कीमतों में सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
21 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 68.95 डॉलर प्रति औंस पर थी और पिछले एक महीने में लगभग 15.5% बढ़ चुकी थी।
आगे किन फैक्टर्स पर नजर रखें?
आने वाले दिनों में इन संकेतकों का असर सोने-चांदी पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है:
- US Fed की ब्याज दर नीति: दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने पर कीमती धातुओं को समर्थन मिल सकता है।
- अमेरिकी महंगाई के आंकड़े: महंगाई में नरमी Fed को नरम रुख अपनाने की गुंजाइश दे सकती है।
- डॉलर इंडेक्स: डॉलर कमजोर होने पर आमतौर पर डॉलर में कीमत वाले सोने-चांदी को फायदा मिल सकता है।
- भू-राजनीतिक तनाव: तनाव बढ़ने पर सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ सकती है।
- केंद्रीय बैंकों की खरीद: केंद्रीय बैंक सोने की मांग का महत्वपूर्ण स्रोत बने हुए हैं।
- औद्योगिक मांग: खासकर चांदी के लिए यह बड़ा ड्राइवर है।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
निकट अवधि में तेजी की संभावना बनी हुई है, लेकिन इसे सीधी रेखा वाली तेजी नहीं मानना चाहिए। हालिया बाजार आकलन में अगले सप्ताह सोने और चांदी में और बढ़त की उम्मीद जताई गई है, जबकि ऊंचे स्तर पर profit booking से अस्थायी गिरावट संभव है।
चांदी में उतार-चढ़ाव खास तौर पर अधिक हो सकता है। J.P. Morgan Global Research ने 2026 की चौथी तिमाही के लिए चांदी का अनुमान करीब 63 डॉलर प्रति औंस रखा है, हालांकि बाजार भाव इससे काफी ऊपर-नीचे जा सकते हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
तेजी देखकर एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय निवेश की जरूरत, समयावधि और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। सोने और चांदी दोनों में कीमतों की अस्थिरता काफी बढ़ी हुई है; BlackRock के विश्लेषण में भी हालिया अवधि में दोनों धातुओं की volatility में उल्लेखनीय वृद्धि बताई गई है।
निष्कर्ष: सोने-चांदी का मौजूदा रुझान सकारात्मक है और Fed की संभावित नरम नीति, कमजोर डॉलर, भू-राजनीतिक जोखिम और निवेश मांग आगे भी कीमतों को सहारा दे सकते हैं। लेकिन इतने तेज उछाल के बाद profit booking का खतरा भी है। इसलिए “दाम निश्चित रूप से और बढ़ेंगे” कहना उचित नहीं होगा; आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और वैश्विक घटनाक्रम दिशा तय करने में अहम रहेंगे।



