अमेरिका-कनाडा में बढ़ी खटास के बीच निर्मला सीतारमण का दौरा क्यों खास?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कनाडा और अमेरिका दौरा मौजूदा वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक परिस्थितियों में काफी अहम माना जा रहा है। सीतारमण 26-27 अगस्त को टोरंटो में कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन के साथ भारत-कनाडा के पहले Economic and Financial Dialogue में हिस्सा लेंगी। बातचीत में निवेश, वित्तीय क्षेत्र, व्यापार और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा होगी।
कनाडा दौरे के दौरान सीतारमण की मुलाकात वहां के प्रमुख कारोबारी नेताओं और भारत-कनाडा व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी होगी। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और कनाडा हाल के वर्षों की कूटनीतिक तल्खी के बाद आर्थिक रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क दोबारा बढ़ा है और निवेश व व्यापार को रिश्तों का प्रमुख आधार बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
इसके बाद अमेरिका में सीतारमण का कार्यक्रम निवेशकों के साथ बैठक पर केंद्रित रहेगा। न्यूयॉर्क में उनकी मुलाकात वैश्विक निवेशकों और वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों से होगी, जहां भारत की आर्थिक संभावनाओं, निवेश के अवसरों और नीतिगत प्राथमिकताओं को सामने रखा जाएगा।
ऐसे समय में जब अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार और रणनीतिक मुद्दों को लेकर मतभेद चर्चा में हैं, भारत दोनों देशों के साथ अपने अलग-अलग आर्थिक हितों और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। सीतारमण का दौरा इसी संतुलित आर्थिक कूटनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा सकता है।



