Sugar Crisis: चीनी पर डबल संकट, रेड रॉट और अल नीनो से घटा उत्पादन

त्योहारों के सीजन से पहले भारत में चीनी की कीमतों में तेजी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। सरकार के मुताबिक इस संकट के पीछे दो बड़े कारण हैं—गन्ने की फसल में रेड रॉट बीमारी और अल नीनो का असर। इन दोनों वजहों से कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिसका असर चीनी के उत्पादन पर भी पड़ा है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार स्थिति को लेकर गंभीर है और चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश में सालाना चीनी की जरूरत करीब 280 लाख टन है और फिलहाल 20 से 25 लाख टन से अधिक का सरप्लस मौजूद है।
सरकार का प्लान B अस्थायी तौर पर कच्ची चीनी के आयात पर केंद्रित है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए आयात के जरिए घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। इससे अचानक पैदा हुई कमी और कीमतों में तेज उछाल को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आंकड़ों के मुताबिक, चीनी की खुदरा कीमत 20 जुलाई को करीब ₹48.18 प्रति किलोग्राम से बढ़कर 20 अगस्त को ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। कीमतों में इस तेजी ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ मिठाई और खाद्य उद्योग की चिंता भी बढ़ाई है।
हालांकि सरकार का कहना है कि देश में फिलहाल पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन उत्पादन में कमी और त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग को देखते हुए सप्लाई मैनेजमेंट अहम हो गया है। आने वाले दिनों में आयात, घरेलू उत्पादन और गन्ने की फसल की स्थिति चीनी की कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



