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RBI की रणनीति हुई सुपरहिट, तीन योजनाओं से भारत में आए $72.8 अरब; FCNR(B) सबसे आगे

रुपये पर दबाव और विदेशी मुद्रा की जरूरत के बीच RBI ने जून 2026 में एक विशेष USD-INR forex swap facility शुरू की थी। इसका मकसद बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना और देश की विदेशी मुद्रा तरलता को मजबूत करना था। अब तक मिले आंकड़ों से पता चलता है कि इस रणनीति को उम्मीद से कहीं ज्यादा सफलता मिली है।

तीन रास्तों से आया पैसा

RBI की सुविधा के तहत विदेशी मुद्रा तीन प्रमुख माध्यमों से जुटाई गई:

माध्यम 21 अगस्त तक जुटाई गई राशि
FCNR(B) Deposits $65.397 अरब
OFCB $4.86 अरब
ECB $2.591 अरब
कुल $72.848 अरब

यानी कुल प्रवाह का लगभग 90% FCNR(B) जमा से आया।

FCNR(B) ने बनाया रिकॉर्ड

FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) deposits में विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी विदेशी मुद्रा बैंक में जमा कर सकते हैं। RBI की इस विशेष सुविधा के तहत बैंकों को 3-5 साल की नई FCNR(B) जमा जुटाने पर पूरी hedging cost वहन करने की अनुमति दी गई थी।

इस योजना से आया $65.4 अरब का प्रवाह 2013 की पिछली FCNR(B) swap window के स्तर को पार कर गया। यही इस पूरी कवायद की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।

RBI ने डेडलाइन क्यों घटाई?

शुरुआत में FCNR(B) के लिए यह सुविधा 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रहने वाली थी। लेकिन जबरदस्त प्रतिक्रिया को देखते हुए RBI ने इसे 31 अगस्त 2026 तक सीमित कर दिया। ECB और OFCB से जुड़े प्रवाह के लिए सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहने की बात RBI ने कही है।

Reuters के मुताबिक, अगस्त के मध्य तक ही करीब $57 अरब का प्रवाह हो चुका था और RBI को लगा कि विदेशी मुद्रा जुटाने का लक्ष्य काफी हद तक पूरा हो चुका है।

विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से बढ़ा

इस रणनीति का असर भारत के forex reserves पर भी दिखाई दिया। 14 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब $716.9 अरब पहुंच गया, जो छह महीने का उच्च स्तर था। केवल एक सप्ताह में इसमें करीब $9.9 अरब की वृद्धि हुई।

पिछले सात सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब $50 अरब की बढ़ोतरी हुई है और यह फरवरी में दर्ज लगभग $728.5 अरब के रिकॉर्ड के करीब पहुंच गया है।

रुपये को कैसे मिलेगा फायदा?

विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ने से RBI और भारतीय बैंकिंग सिस्टम को डॉलर की liquidity में मदद मिलती है। इससे अचानक डॉलर की कमी और रुपये पर पड़ने वाले दबाव को संभालने में मदद मिल सकती है।

खासकर महंगे कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव जैसे समय में पर्याप्त forex reserves भारत की external-sector resilience को मजबूत करते हैं।

लेकिन इसकी एक कीमत भी है

यह समझना जरूरी है कि ये डॉलर भारत को मुफ्त में नहीं मिले हैं। FCNR(B) जमा बैंकिंग सिस्टम की विदेशी मुद्रा देनदारी भी हैं। RBI के swap mechanism और hedging arrangements की लागत होती है।

Reuters की रिपोर्ट में विश्लेषकों ने यह भी चेताया कि बहुत बड़े विदेशी मुद्रा inflows के साथ external liabilities, घरेलू liquidity और भविष्य की maturity risks जैसे पहलुओं पर नजर रखना जरूरी है।

क्या RBI की रणनीति सफल रही?

अब तक के आंकड़ों के आधार पर इसे सफल रणनीति कहना उचित है। जून में शुरू हुई सुविधा ने केवल दो-ढाई महीने में $72.8 अरब से ज्यादा विदेशी मुद्रा जुटाई और forex reserves को $716.9 अरब तक पहुंचाने में योगदान दिया।

हालांकि असली परीक्षा आगे होगी—इन विदेशी मुद्रा प्रवाहों का रुपये, liquidity, external liabilities और balance of payments पर दीर्घकालीन असर कैसा रहता है।

निष्कर्ष: RBI की तीन-स्तरीय forex strategy ने भारत में $72.85 अरब का विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित किया है, जिसमें FCNR(B) का योगदान सबसे बड़ा रहा। मजबूत forex reserves भारत को रुपये और बाहरी भुगतान से जुड़े झटकों से निपटने में अतिरिक्त सुरक्षा देते हैं। लेकिन इन inflows को केवल “मुफ्त डॉलर” समझना सही नहीं होगा, क्योंकि इनके साथ भविष्य की देनदारियां और hedging लागत भी जुड़ी हैं।

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