Cognizant Green Card: ट्रंप प्रशासन का शिकंजा, ग्रीन कार्ड फाइलिंग पर रोक

ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका में इमिग्रेशन और वीजा नियमों को लेकर सख्ती लगातार बढ़ रही है। इसी कड़ी में अमेरिकी श्रम विभाग ने भारत में स्थापित टेक कंपनी Cognizant की नई ग्रीन कार्ड फाइलिंग पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई कंपनी के वीजा प्रोग्राम से जुड़े कथित फ्रॉड और नियमों के उल्लंघन की जांच के बीच हुई है।
Cognizant के लिए यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि PERM यानी Permanent Labor Certification अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का अहम चरण है। नई PERM फाइलिंग रुकने से उन कर्मचारियों की स्थायी निवास की योजनाओं पर असर पड़ सकता है, जिन्हें कंपनी के जरिए ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप मिलने की उम्मीद है।
वीजा फ्रॉड की जांच के बीच कार्रवाई
अमेरिकी अधिकारियों ने H-1B और PERM जैसे रोजगार आधारित इमिग्रेशन कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी और दुरुपयोग को लेकर जांच तेज की है। श्रम विभाग की कार्रवाई इसी व्यापक जांच का हिस्सा बताई जा रही है। हालांकि Cognizant के खिलाफ जांच में लगाए गए विशिष्ट आरोपों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
भारतीय कर्मचारियों पर क्या असर?
Cognizant अमेरिका में बड़ी संख्या में विदेशी और भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को रोजगार देती है। ऐसे कर्मचारियों के लिए PERM फाइलिंग लंबे समय तक अमेरिका में काम करने और आगे चलकर स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया से जुड़ी होती है। इसलिए नई फाइलिंग पर रोक से कंपनी के जरिए ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे कर्मचारियों में चिंता बढ़ सकती है।
H-1B और Green Card में क्या संबंध है?
H-1B वीजा विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है, जबकि रोजगार आधारित Green Card स्थायी निवास का रास्ता खोलता है। कई मामलों में नियोक्ता विदेशी कर्मचारी के लिए PERM प्रक्रिया शुरू करता है। इसी वजह से Cognizant की PERM फाइलिंग पर रोक का असर उसके विदेशी कर्मचारियों के दीर्घकालिक इमिग्रेशन प्लान पर पड़ सकता है।
सिर्फ Cognizant ही नहीं
इस कार्रवाई में सॉफ्टवेयर कंपनी Cloudera की PERM फाइलिंग भी निलंबित की गई है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन रोजगार आधारित इमिग्रेशन सिस्टम में कंपनियों की भूमिका और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर व्यापक स्तर पर जांच कर रहा है।
‘America First’ नीति का असर
ट्रंप प्रशासन की नीतियों में अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने और विदेशी श्रमिक कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग पर कार्रवाई करने पर जोर रहा है। ऐसे में टेक कंपनियों द्वारा H-1B और अन्य रोजगार आधारित इमिग्रेशन कार्यक्रमों के इस्तेमाल की जांच और सख्त होने की संभावना है।
हालांकि PERM फाइलिंग पर रोक का मतलब यह नहीं है कि Cognizant के सभी मौजूदा विदेशी कर्मचारियों का वीजा या पहले से मंजूर इमिग्रेशन स्टेटस खत्म हो गया है। फिलहाल कार्रवाई मुख्य रूप से नई PERM फाइलिंग से संबंधित बताई गई है और आगे की स्थिति जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।
Cognizant पर हुई यह कार्रवाई भारतीय IT सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। अगर अमेरिकी प्रशासन इसी तरह की जांच दूसरी कंपनियों तक बढ़ाता है, तो H-1B और Green Card स्पॉन्सरशिप पर निर्भर भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए इमिग्रेशन प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल Cognizant की नई PERM फाइलिंग पर रोक और चल रही जांच के कारण कंपनी के साथ-साथ उसके विदेशी कर्मचारियों की नजर अमेरिकी अधिकारियों के अगले फैसले पर है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह रोक कितने समय तक जारी रहती है और कंपनी की ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप प्रक्रिया कब सामान्य होती है।



