BRICS Summit 2026: भारत को क्या मिलेगा फायदा? चीन के साथ व्यापार घाटे पर नजर

भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन की मेजबानी भारत कर रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बदलाव हो रहे हैं, भारत के लिए BRICS केवल कूटनीतिक मंच नहीं बल्कि आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।
भारत की कोशिश BRICS को व्यावहारिक आर्थिक सहयोग का मंच बनाने की है। व्यापार, तकनीक, वित्त, ऊर्जा, सप्लाई चेन और डिजिटल पेमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना इस साल भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे भारतीय कंपनियों और कारोबारियों के लिए नए बाजार और निवेश के अवसर खुल सकते हैं।
चीन के साथ व्यापार घाटा बड़ी चुनौती
BRICS के मंच पर भारत के लिए चीन के साथ व्यापार असंतुलन अहम मुद्दा हो सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा करीब 99 अरब डॉलर रहा। ऐसे में नई दिल्ली की कोशिश चीन से आयात और भारतीय उत्पादों के निर्यात के बीच संतुलन बेहतर करने की हो सकती है।
चीन से टेक्नोलॉजी आयात पर भी नजर
भारत और चीन के बीच व्यापार केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चीनी तकनीक और कच्चे माल की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत BRICS के दौरान तकनीकी आयात और निवेश से जुड़ी बाधाओं को कम करने का मुद्दा उठा सकता है।
क्या चीन की ‘चाल’ धीमी होगी?
BRICS में चीन का आर्थिक प्रभाव काफी बड़ा है, लेकिन भारत इस समूह को किसी एक देश के प्रभाव वाला मंच बनाने के बजाय संतुलित और व्यावहारिक सहयोग के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है। नई दिल्ली की रणनीति चीन के साथ आर्थिक संवाद बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करने की है।
ट्रंप फैक्टर भी महत्वपूर्ण
अमेरिका की व्यापार नीतियों और टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के बीच BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग का महत्व बढ़ गया है। भारत के सामने चुनौती यह है कि वह BRICS में सहयोग बढ़ाए, लेकिन अपने पश्चिमी साझेदारों के साथ संबंधों को भी संतुलित रखे। यही वजह है कि भारत BRICS को किसी टकराव वाले भू-राजनीतिक गठबंधन के बजाय आर्थिक सहयोग के मंच के रूप में देखना चाहता है।
भारत को मिल सकता है बड़ा कूटनीतिक फायदा
BRICS की अध्यक्षता भारत को ग्लोबल साउथ में अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर देती है। डिजिटल वित्त, MSME व्यापार, वैश्विक सप्लाई चेन, स्वास्थ्य, ऊर्जा और सतत विकास जैसे मुद्दों पर भारत अपनी पहल को आगे बढ़ा सकता है।
निवेश के नए रास्ते
BRICS समिट के दौरान करीब 500 प्रमुख निवेशकों की भागीदारी और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की योजना भी भारत के लिए अहम है। बेहतर वित्तीय कनेक्टिविटी और निवेश सहयोग से भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी और कारोबारी अवसर बढ़ाने की संभावना बन सकती है।
हालांकि BRICS के भीतर सभी देशों के हित एक जैसे नहीं हैं। चीन, रूस और कुछ अन्य सदस्य BRICS को वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में पश्चिमी प्रभुत्व के विकल्प के रूप में अधिक प्रभावी बनाना चाहते हैं, जबकि भारत आर्थिक सहयोग और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर देता है। इसलिए नई दिल्ली के लिए सहमति बनाना भी बड़ी कूटनीतिक परीक्षा होगी।
कुल मिलाकर BRICS Summit 2026 भारत के लिए व्यापार घाटा कम करने, चीन के साथ आर्थिक संवाद बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और ग्लोबल साउथ में अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर है। असली सफलता इस बात से तय होगी कि सम्मेलन के दौरान लिए गए फैसले कितने ठोस आर्थिक लाभ में बदलते हैं।



