ITAT का बड़ा फैसला: बैंक में जमा हर पैसा टैक्स योग्य इनकम नहीं

बैंक खाते में बड़ी रकम जमा होने पर आयकर विभाग की नजर पड़ सकती है, लेकिन खाते में जमा हर पैसा अपने आप टैक्स योग्य आय नहीं बन जाता। हाल के ITAT मामलों में इस बात को लेकर महत्वपूर्ण राहत मिली है कि किसी जमा रकम की प्रकृति और उसके स्रोत को देखे बिना पूरी राशि को आय मानना सही नहीं है।
खास तौर पर Section 44AD के तहत presumptive taxation अपनाने वाले कारोबारियों के मामले में यह बात महत्वपूर्ण है। इस प्रावधान में पात्र छोटे कारोबारियों की आय को निर्धारित आधार पर अनुमानित किया जाता है। आयकर विभाग के अनुसार, सामान्य तौर पर पात्र कारोबार में 8 प्रतिशत टर्नओवर या सकल प्राप्तियों को अनुमानित लाभ माना जाता है, जबकि कुछ शर्तों के तहत अलग सीमा लागू होती है।
एक हालिया ITAT मामले में कारोबारी ने करीब ₹56.62 लाख का टर्नओवर घोषित किया था और Section 44AD के तहत आय पर टैक्स दिया था। उसके बैंक खाते में ₹19 लाख की नकद जमा को अलग से unexplained income मान लिया गया। ITAT ने कहा कि जब घोषित टर्नओवर स्वीकार किया जा चुका है और जमा राशि कारोबार के स्तर से मेल खाती है, तो उसे सिर्फ बैंक में जमा होने के कारण अलग से अघोषित आय नहीं माना जा सकता।
हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बैंक में जमा किसी भी रकम पर टैक्स नहीं लगेगा। यदि करदाता यह साबित नहीं कर पाता कि पैसा उसके घोषित कारोबार से आया है या उसका वैध स्रोत क्या है, तो आयकर विभाग रकम की जांच कर सकता है और परिस्थितियों के आधार पर उसे unexplained income के रूप में जोड़ सकता है। ITAT के एक अन्य फैसले में भी स्पष्ट किया गया कि Section 44AD individual bank deposits की व्याख्या से राहत दे सकता है, लेकिन कारोबार और सकल प्राप्तियों के स्रोत को साबित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह खत्म नहीं करता।
इस फैसले का सबसे अहम संदेश यह है कि बैंक स्टेटमेंट में दिखने वाली कुल जमा राशि और टैक्सेबल इनकम एक ही चीज नहीं हैं। जमा रकम का स्रोत, कारोबार का टर्नओवर, पहले की निकासी, लोन, परिवार की बचत और अन्य वैध लेनदेन जैसे पहलुओं को भी देखा जाना जरूरी है। इसलिए बड़े बैंक लेनदेन का रिकॉर्ड और उसके स्रोत से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना करदाताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।



