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चीन ने दी 98 नई जीएम फसलों को मंजूरी, आयात पर निर्भरता होगी कम

चीन ने हाल ही में अधिक उपज देने वाली 98 नई जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) किस्मों को मंजूरी दी है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश की कृषि उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और खाद्यान्न के आयात पर निर्भरता को कम करना है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश के रूप में चीन लगातार खाद्यान्न सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौतियों का सामना करता रहा है। चावल, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलों की भारी खपत होने के बावजूद, अब तक चीन को अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ता था। लेकिन सरकार द्वारा जीएम तकनीक को अपनाने की दिशा में उठाया गया यह कदम कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जीएम किस्में न केवल उपज बढ़ाएंगी, बल्कि कीटों और बीमारियों के खिलाफ भी फसलों को अधिक मजबूत बनाएंगी। इससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन मिलेगा और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। चीन लंबे समय से आयातित सोयाबीन पर निर्भर रहा है, खासतौर पर अमेरिका और ब्राजील से। ऐसे में स्वदेशी उच्च उपज वाली किस्मों का उपयोग करने से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि स्थानीय किसानों को भी अधिक लाभ मिलेगा।

चीन सरकार ने इस कदम को कृषि सुधार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया है। विशेषज्ञ इसे “भविष्य की खेती” की ओर बढ़ने वाला कदम मानते हैं, क्योंकि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए टिकाऊ और अधिक उत्पादन वाली फसलें ही आने वाले समय में समाधान साबित होंगी।

कुल मिलाकर, 98 नई जीएम किस्मों की स्वीकृति चीन के लिए एक ऐतिहासिक फैसला है जो कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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