GST Data पर विवाद, पूर्व वित्त सचिव के दावे पर SBI अर्थशास्त्री का जवाब

GST कलेक्शन के आंकड़ों को लेकर सरकार और अर्थशास्त्रियों के बीच बहस तेज हो गई है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने अप्रैल-अगस्त की GST ग्रोथ को लेकर सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि सेस को अलग रखने से कलेक्शन की वास्तविक तस्वीर बदल जाती है।
SBI के अर्थशास्त्री सौम्यकांति घोष ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि GST आंकड़ों की तुलना एक समान आधार पर करनी चाहिए। उनके मुताबिक मई के आंकड़ों में हाई बेस इफेक्ट समेत कुछ महत्वपूर्ण बदलावों को नजरअंदाज किया गया।
इस विवाद में GST व्यवस्था में हुए बदलाव भी अहम हैं। CBIC के अनुसार सितंबर 2025 से अधिकांश Compensation Cess बंद हो चुका है और नवंबर 2025 से GST आंकड़ों में सेस को अलग दिखाया जा रहा है। ऐसे में पुराने और नए टैक्स ढांचे के आंकड़ों की सीधे तुलना करना भ्रामक हो सकता है।
घोष ने पांच महीनों के औसत GST कलेक्शन को देखने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि सिर्फ किसी एक महीने के आंकड़े के आधार पर पूरी अर्थव्यवस्था या GST राजस्व की दिशा पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
GST डेटा को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत की आर्थिक वृद्धि और सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी चर्चा चल रही है। ऐसे में टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों की गणना और तुलना का तरीका आने वाले दिनों में आर्थिक बहस का अहम मुद्दा बना रह सकता है।



