India Alternative Market: 15 देशों में ₹19 लाख करोड़ का बाजार, US टैरिफ से नहीं डरेगा भारत

अमेरिका की 100% टैरिफ की धमकी के बीच भारत ने अपनी व्यापार और ऊर्जा रणनीति में विविधता लाने पर जोर बढ़ा दिया है। अगर अमेरिका रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लागू करता है, तो भारत के लिए रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने के विकल्प मौजूद हैं। विश्लेषकों के मुताबिक 15 देशों में फैला करीब 200 अरब डॉलर का बाजार भारत को वैकल्पिक अवसर दे सकता है।
15 देशों में करीब ₹19 लाख करोड़ का बाजार
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के सामने 15 देशों में लगभग 200 अरब डॉलर का संभावित बाजार मौजूद है। यह बाजार भारतीय कंपनियों को निर्यात और व्यापार के लिए नए अवसर दे सकता है। अमेरिका के साथ व्यापारिक दबाव बढ़ने की स्थिति में ऐसे वैकल्पिक बाजार भारत की रणनीतिक मजबूती बढ़ा सकते हैं।
रूसी तेल पर अमेरिकी दबाव
अमेरिका की ओर से रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की संभावना ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ाई है। हालांकि ऐसी व्यवस्था का वास्तविक असर उसके लागू होने और अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास जरूरत पड़ने पर रूसी तेल की जगह अन्य स्रोतों से खरीद बढ़ाने की क्षमता है।
भारत ने पहले से शुरू कर दी है तैयारी
भारत ने हाल के वर्षों में अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में काफी विविधता लाई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत अब 41 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जबकि पहले यह संख्या 27 थी। इसी तरह LNG के सप्लायर देशों की संख्या भी 6 से बढ़कर 15 हो गई है।
मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से बढ़ सकती है खरीद
अगर रूसी तेल पर अमेरिकी दबाव बढ़ता है तो भारत पश्चिम एशिया के साथ-साथ अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के तेल उत्पादक देशों से खरीद बढ़ा सकता है। इससे किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि वैकल्पिक स्रोतों से खरीद की कीमत, शिपिंग लागत और वैश्विक तेल कीमतें महत्वपूर्ण कारक रहेंगी।
100% टैरिफ का असर सिर्फ भारत पर नहीं होगा
विशेषज्ञों के अनुसार रूसी तेल पर 100% टैरिफ लगाने से केवल भारत जैसे खरीदार प्रभावित नहीं होंगे। वैश्विक तेल कीमतों और सप्लाई चेन पर भी इसका असर पड़ सकता है। अगर रूसी तेल की आपूर्ति में बड़ी बाधा आती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने का जोखिम रहेगा, जिसका असर अमेरिकी उपभोक्ताओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
भारत के लिए क्या है सबसे बड़ा विकल्प?
भारत के लिए सबसे अहम रणनीति एक साथ कई मोर्चों पर निर्भरता कम करना है। एक ओर ऊर्जा आयात के स्रोतों को बढ़ाना और दूसरी ओर निर्यात के लिए नए बाजार विकसित करना भारत को बाहरी दबावों से बचा सकता है। 15 देशों में संभावित बाजार इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
नए बाजारों से निर्यात को मिलेगा सहारा
अमेरिका भारतीय निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बाजार है, लेकिन किसी एक बाजार पर अत्यधिक निर्भरता व्यापारिक जोखिम बढ़ा सकती है। नए देशों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ने से निर्यातकों को वैकल्पिक ग्राहक मिल सकते हैं। खासकर इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, फार्मा, कृषि उत्पाद और अन्य विनिर्मित वस्तुओं के लिए नए बाजार महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, अमेरिकी टैरिफ की धमकी भारत के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन देश ने ऊर्जा आयात और निर्यात बाजारों में विविधता लाने की दिशा में पहले से कदम उठाए हैं। 15 देशों में संभावित बड़ा बाजार और 41 देशों से कच्चे तेल की खरीद भारत को किसी एक देश पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि अंतिम असर अमेरिकी टैरिफ नीति, वैश्विक तेल कीमतों और भारत के व्यापारिक फैसलों पर निर्भर करेगा।



