Tata Sons की 18.4% हिस्सेदारी पर डील? SP Group के 3 विकल्प

Tata Sons में Shapoorji Pallonji Group की 18.4% हिस्सेदारी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। SP Group इस हिस्सेदारी से वैल्यू अनलॉक कर अपने महंगे कर्ज का बोझ कम करना चाहता है। इसी को लेकर Tata Group और SP Group के बीच कई दौर की बातचीत चल रही है।
सबसे दिलचस्प विकल्प शेयर स्वैप का है। इसके तहत SP Group अपनी Tata Sons हिस्सेदारी के बदले Tata Power जैसी सूचीबद्ध Tata कंपनियों के शेयर हासिल कर सकता है। इससे SP Group को अपनी हिस्सेदारी को सीधे बेचने के बजाय सूचीबद्ध शेयरों के रूप में नकदी जुटाने का रास्ता मिल सकता है।
दूसरा विकल्प Tata Sons द्वारा SP Group की हिस्सेदारी की सीधी खरीद का है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस खरीद को विदेशी बैंकों से मिलने वाली फंडिंग के जरिए पूरा करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस मॉडल में फंडिंग, वैल्यूएशन और नियामकीय पहलू बड़ी चुनौती हो सकते हैं।
तीसरे विकल्प के तौर पर SP Group अपनी हिस्सेदारी किसी बाहरी निवेशक को बेच सकता है। बातचीत में किसी बड़े वैश्विक निवेशक को प्राथमिकता देने की संभावना भी सामने आई है। इससे SP Group को सीधे बड़ी मात्रा में पूंजी मिल सकती है और Tata Sons में उसकी हिस्सेदारी का लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा भी खत्म हो सकता है।
SP Group पर कर्ज का दबाव इस पूरी प्रक्रिया की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। समूह ने हाल में बड़ी प्राइवेट-क्रेडिट फंडिंग पूरी की है और महंगे कर्ज की अदायगी के लिए Tata Sons में अपनी हिस्सेदारी को मोनेटाइज करना महत्वपूर्ण हो गया है।
हालांकि, इस संभावित डील के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती Tata Sons की वैल्यूएशन हो सकती है। Tata Sons एक निजी होल्डिंग कंपनी है और इसके तहत कई बड़ी सूचीबद्ध तथा गैर-सूचीबद्ध कंपनियां आती हैं। इसलिए दोनों पक्षों के लिए हिस्सेदारी की उचित कीमत पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।
शेयर स्वैप का विकल्प अपनाने पर कानूनी और नियामकीय सवाल भी उठ सकते हैं, क्योंकि इसमें सूचीबद्ध Tata कंपनियों के शेयर शामिल होंगे। दोनों पक्ष संभावित सौदों की कानूनी संरचना और नियामकीय मंजूरियों की जरूरत का आकलन कर रहे हैं।
फिलहाल यह बातचीत शुरुआती चरण में है और किसी पक्के सौदे की घोषणा नहीं हुई है। डील की संरचना आगे बदल भी सकती है। अगर Tata Group और SP Group किसी समझौते पर पहुंचते हैं, तो इससे दोनों समूहों के बीच लंबे समय से चले आ रहे हिस्सेदारी विवाद को सुलझाने में मदद मिल सकती है।



