
नई दिल्ली में सांसदों के लिए बने नए आवासीय फ्लैट्स के उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में राजनीति पर एक तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि “कोसी का नाम आते ही कुछ लोगों को बिहार चुनाव दिखाई देता है”। पीएम मोदी का यह बयान न केवल हल्के-फुल्के अंदाज़ में था, बल्कि इसमें राजनीतिक संदेश भी छिपा था। दरअसल, कोसी नदी और उससे जुड़ा इलाका बिहार के राजनीतिक समीकरणों में एक अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि इस नाम का जिक्र होते ही वहां के राजनीतिक माहौल की चर्चा शुरू हो जाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में विकास के कामों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के लिए भी आधुनिक और सुविधाजनक संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। नए सांसद आवास परिसर का निर्माण इसी सोच का हिस्सा है। उन्होंने यह भी बताया कि इन फ्लैट्स को ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संतुलन और आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने यह भी इशारा किया कि राजनीति में अक्सर कुछ मुद्दों को चुनावी नजरिये से देखा जाता है, जबकि उनका असल उद्देश्य विकास और जनता की भलाई से जुड़ा होता है। कोसी नदी के संदर्भ में उन्होंने बताया कि यह न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है। इसके किनारे बसे लोगों की जिंदगी, आजीविका और संस्कृति इस नदी से गहराई से जुड़ी है।
पीएम मोदी ने कहा कि कोसी क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें बाढ़ प्रबंधन, बुनियादी ढांचे का निर्माण और पर्यटन को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन प्रयासों को राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि विकास के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी ने सांसदों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जनहित के कार्यों पर ध्यान दें और संसद परिसर में बनाए गए नए आवासों का इस्तेमाल बेहतर कार्य क्षमता के लिए करें। उन्होंने कहा कि बेहतर सुविधा मिलने से सांसद अपने काम पर अधिक फोकस कर पाएंगे, जिससे जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम में मौजूद कई वरिष्ठ नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों ने प्रधानमंत्री के इस बयान पर मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी, लेकिन यह साफ था कि पीएम मोदी ने हल्के अंदाज में एक गंभीर राजनीतिक संदेश दे दिया है। उनके इस बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि वे विपक्ष की चुनावी राजनीति पर कटाक्ष करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने देश के बुनियादी ढांचे में हो रहे बदलावों का भी जिक्र किया और कहा कि संसद परिसर का आधुनिकीकरण, सांसद आवास और अन्य सुविधाएं, भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में संसद और सरकार का कामकाज और भी तकनीकी रूप से सक्षम और पर्यावरण के अनुकूल होगा।



