यूपी के अफसरों को सख्त निर्देश: जनप्रतिनिधियों के कॉल का 10 मिनट में देना होगा जवाब

उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही को और मजबूत करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार की ओर से सभी जिलों और विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे जनप्रतिनिधियों—जैसे सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों—के फोन कॉल का जवाब अधिकतम 10 मिनट के भीतर दें। यदि किसी कारणवश अधिकारी तत्काल कॉल रिसीव नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें निर्धारित समय सीमा के अंदर वापस कॉल करना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि जनप्रतिनिधि जनता और शासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं, इसलिए उनकी बातों को प्राथमिकता देना प्रशासन की जिम्मेदारी है। कई बार शिकायतें मिली थीं कि जनप्रतिनिधियों के फोन का जवाब समय पर नहीं मिलता, जिससे विकास कार्यों और जनसमस्याओं के समाधान में देरी होती है। नए निर्देशों के तहत मुख्य सचिव स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक सभी अधिकारियों को सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इस आदेश का उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता, संवाद और त्वरित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देना है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा लापरवाही बरती जाती है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह कदम सुशासन और जवाबदेही की दिशा में अहम माना जा रहा है, जिससे जनता की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा और शासन-प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।


