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आर्टिफिशियल फूड कलर्स: दिखते खूबसूरत, पर सेहत के लिए धीमा जहर

धीमा जहर हैं आंखों को लुभाने वाले आर्टिफिशियल फूड कलर्स, सेहत पर पड़ सकता है भारी

आज के दौर में बाजार में मिलने वाले ज्यादातर प्रोसेस्ड फूड्स – जैसे कैंडी, आइसक्रीम, केक, चिप्स, ड्रिंक्स आदि – को रंग-बिरंगा और आकर्षक दिखाने के लिए आर्टिफिशियल फूड कलर्स का इस्तेमाल किया जाता है। ये रंग देखने में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन सेहत के लिए किसी धीमे ज़हर से कम नहीं हैं।

आर्टिफिशियल फूड कलर्स के नियमित सेवन से शरीर पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। इनमें सिरदर्द, एलर्जी, त्वचा की समस्याएं, डाइजेशन संबंधी दिक्कतें और बच्चों में अत्यधिक एक्टिवनेस या ध्यान भटकाव (ADHD) जैसी समस्याएं देखी गई हैं। कुछ रिसर्च यह भी इशारा करती हैं कि कुछ रंगों में कैंसर कारक तत्व हो सकते हैं, विशेषकर जब उनका अत्यधिक मात्रा में सेवन किया जाए।

विशेष रूप से टार्ट्राजीन (Yellow No. 5), रेड 40 और ब्लू 1 जैसे रंग सबसे ज्यादा विवादास्पद माने जाते हैं। कई देशों में कुछ फूड कलर्स पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।

सुझाव: कोशिश करें कि आप घर का बना खाना खाएं और प्राकृतिक रंग जैसे हल्दी, चुकंदर, पालक या गाजर का उपयोग करें। पैक्ड फूड खरीदते समय लेबल जरूर पढ़ें और ‘Artificial Colors’ या ‘E Numbers’ से बचें।

याद रखें, जो आंखों को अच्छा लगे, जरूरी नहीं कि शरीर के लिए भी अच्छा हो। सेहतमंद जीवन के लिए सजग रहना जरूरी है।

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