लाइफस्टाइल
ऑफिस में दूसरों से तुलना क्यों बढ़ाती है तनाव? करियर पर भी पड़ सकता है असर
नौकरी में प्रमोशन या सैलरी का फैसला सिर्फ मेहनत और टैलेंट पर निर्भर नहीं करता। कंपनी की जरूरत, टीम की भूमिका, जिम्मेदारियां, समय और कई अन्य परिस्थितियां भी फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए किसी कलीग की तरक्की को अपनी क्षमता का सीधा पैमाना मानना जरूरी नहीं है।
बार-बार यह सोचना कि किसी दूसरे कर्मचारी को ज्यादा सैलरी या बेहतर पद क्यों मिला, व्यक्ति को अपनी उपलब्धियों पर संदेह करने की ओर ले जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसी तुलना तनाव और निराशा बढ़ाने के साथ आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर सकती है।
करियर में सफलता का मतलब हर बार दूसरे व्यक्ति से आगे निकलना नहीं होता। किसी के लिए ज्यादा सैलरी महत्वपूर्ण हो सकती है, जबकि कोई बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस, नई स्किल सीखने या कम तनाव वाली भूमिका को प्राथमिकता दे सकता है। इसलिए दूसरों की उपलब्धियों के आधार पर अपने करियर का मूल्यांकन करना हमेशा सही तस्वीर नहीं देता।
अपनी ग्रोथ पर ध्यान देने के लिए यह देखना ज्यादा उपयोगी हो सकता है कि पिछले कुछ समय में आपने कौन-सी नई स्किल सीखी, आपकी जिम्मेदारियां कितनी बढ़ीं और आपके काम में कितना सुधार हुआ। दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी पिछली स्थिति से तुलना करने से करियर की प्रगति को अधिक स्पष्ट तरीके से देखा जा सकता है।