कोलन कैंसर के लक्षण: युवाओं में क्यों बढ़ रहा है खतरा?
कोलन कैंसर, जिसे आम भाषा में आंत का कैंसर कहा जाता है, पहले माना जाता था कि यह 50 की उम्र के बाद ही होता है, लेकिन हाल के वर्षों में 30-40 वर्ष की उम्र के युवाओं में इसके मामले तेजी से बढ़े हैं। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खान-पान, फाइबर की कमी, लगातार बैठने की आदत, और बढ़ता स्ट्रेस इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। दुर्भाग्यवश, कई बार यह बीमारी तब तक पकड़ में नहीं आती जब तक यह गंभीर स्टेज में न पहुंच जाए। इसलिए, इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर जांच करवाना बेहद जरूरी है।
कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:
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पेट में लगातार दर्द या ऐंठन
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मल त्याग की आदतों में बदलाव (कब्ज या दस्त)
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मल में खून आना या उसका रंग काला हो जाना
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कमजोरी और थकान रहना, भले ही आराम किया हो
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बिना कोशिश वजन कम होना
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हमेशा पेट भरा-भरा महसूस होना
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आयरन की कमी (एनीमिया), खासकर बिना किसी स्पष्ट वजह के
अगर उपरोक्त में से कोई लक्षण लगातार कुछ हफ्तों तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। युवाओं में यह बीमारी अधिक आक्रामक हो सकती है, क्योंकि अक्सर इसे देर से पहचाना जाता है।
इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप अपनी डाइट में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और रेड मीट से दूरी बनाएं। नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और स्मोकिंग व अल्कोहल से बचें। फैमिली हिस्ट्री हो तो 30 की उम्र के बाद कोलोनोस्कोपी जैसी स्क्रीनिंग करवाना भी समझदारी भरा कदम हो सकता है।



