देशबड़ी खबर

कैलाश मानसरोवर यात्रा: क्यों लोकप्रिय है रसुवा रूट, जानें पूरा मार्ग

कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू धर्म की प्रमुख तीर्थ यात्राओं में शामिल है। कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तिब्बत में स्थित हैं, लेकिन भारत से जाने वाले कई श्रद्धालु नेपाल के रास्ते इस यात्रा को पूरा करते हैं। नेपाल का रसुवा जिला और रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र इस यात्रा के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है।

नेपाल के रास्ते कैलाश जाने वाले यात्रियों का प्रमुख ओवरलैंड रूट काठमांडू-रसुवागढ़ी-केरुंग है। भारतीय यात्री पहले नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचते हैं और वहां से सड़क मार्ग के जरिए रसुवा जिले की ओर बढ़ते हैं। इसके बाद रसुवागढ़ी सीमा पार कर यात्री तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में प्रवेश करते हैं।

रसुवा रूट की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह इसकी अपेक्षाकृत आसान पहुंच मानी जाती है। भारत से नेपाल पहुंचने के बाद सड़क मार्ग के जरिए यात्रा को आगे बढ़ाया जा सकता है। कई यात्रियों के लिए यह मार्ग समय और खर्च के लिहाज से भी सुविधाजनक विकल्प माना जाता है।

रसुवागढ़ी नेपाल और चीन के बीच स्थित महत्वपूर्ण सीमा क्षेत्र है। ऐतिहासिक रूप से यह इलाका नेपाल-तिब्बत व्यापार और आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण रहा है। आज यही सीमा क्षेत्र कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए नेपाल से तिब्बत में प्रवेश का प्रमुख रास्ता बन गया है।

काठमांडू से आगे यात्रा के दौरान तीर्थयात्री त्रिशूली और भोटेकोशी नदी घाटियों से होकर रसुवा जिले की ओर जाते हैं। पहाड़ी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह यात्रा सामान्य मैदानी सड़क यात्रा से काफी अलग होती है। मौसम और सड़क की स्थिति भी यात्रा को प्रभावित कर सकती है।

नेपाल रूट का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यहां से यात्रा करने वाले श्रद्धालु सड़क मार्ग से तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में पहुंचते हैं। इसके बाद कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की ओर यात्रा आगे बढ़ती है। ऊंचाई बढ़ने के साथ मौसम और ऑक्सीजन की कमी यात्रियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

हालांकि, इस बार रसुवा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने इस मार्ग की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से सड़क, पुल और सीमा क्षेत्र के आसपास का बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ। बड़ी संख्या में भारतीय और अन्य विदेशी यात्रियों के संपर्क से बाहर होने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी।

बाढ़ की चपेट में आए यात्रियों में बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की बताई गई। कई यात्री रसुवागढ़ी के रास्ते चीन-तिब्बत सीमा पार करने की तैयारी में थे। प्राकृतिक आपदा के कारण संपर्क और सड़क व्यवस्था बाधित होने से यात्रियों को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

इस घटना ने कैलाश यात्रा के नेपाल रूट की सुविधाओं के साथ-साथ इसकी भौगोलिक और प्राकृतिक चुनौतियों को भी उजागर किया है। पहाड़ी इलाकों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और खराब मौसम यात्रा की योजना को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए मौसम और स्थानीय प्रशासन की सलाह पर नजर रखना बेहद जरूरी है।

भारत से कैलाश मानसरोवर जाने के लिए नेपाल का रास्ता ही एकमात्र विकल्प नहीं है। भारत सरकार के माध्यम से आयोजित यात्रा में उत्तराखंड के लिपुलेख मार्ग का भी इस्तेमाल किया जाता है। 2026 की आधिकारिक यात्रा का अंतिम जत्था भी लिपुलेख दर्रे के रास्ते भारत वापस लौटा है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा धार्मिक आस्था के साथ भारत-चीन और नेपाल से जुड़े सीमा एवं पर्यटन संबंधों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। रसुवा-रसुवागढ़ी मार्ग ने पिछले वर्षों में भारतीय यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक कॉरिडोर के रूप में अपनी पहचान बनाई है। हालांकि, मौजूदा आपदा के बाद इस मार्ग की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं।

Zee NewsTimes

Founded in 2018, Zee News Times has quickly emerged as a leading news source based in Lucknow, Uttar Pradesh. Our mission is to inspire, educate, and outfit our readers for a lifetime of adventure and stewardship, reflecting our commitment to providing comprehensive and reliable news coverage.

संबंधित समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button