
नेपाल और भूटान से लगी भारत की सीमाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार ने SSB की भूमिका को और व्यापक बनाने पर जोर दिया है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने कहा कि बल को सीमा सुरक्षा के साथ अपनी मूल सामुदायिक भूमिका को भी दोबारा मजबूत करना चाहिए।
गोविंद मोहन के अनुसार, SSB की स्थापना के शुरुआती दौर में सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ मजबूत संपर्क बनाना, उनमें सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना और स्थानीय स्तर पर खुफिया नेटवर्क तैयार करना प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल था। समय के साथ सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी बढ़ने के कारण यह भूमिका कुछ कमजोर हुई।
गृह सचिव ने SSB से स्थानीय लोगों के साथ बेहतर तालमेल बनाने की अपील की है। उनका मानना है कि सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों का सहयोग सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। स्थानीय स्तर से मिलने वाली सूचनाएं संदिग्ध गतिविधियों की पहचान में मददगार हो सकती हैं।
SSB नेपाल और भूटान से लगी भारत की खुली और बिना बाड़ वाली सीमाओं की सुरक्षा करती है। ऐसी सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ स्थानीय आबादी के साथ संवाद और सहयोग भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए SSB आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल कर रही है। ड्रोन, माइक्रो यूएवी, फेस रिकग्निशन और अन्य निगरानी तकनीकों के जरिए संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने की क्षमता बढ़ाई गई है।
गृह सचिव ने सीमा सुरक्षा के लिए एक व्यापक सुरक्षा ढांचे का भी उल्लेख किया, जिसमें सीमा सुरक्षा बलों के साथ राज्य सरकार के अधिकारी, पुलिस, केंद्रीय एजेंसियां और सीमा क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय समुदाय शामिल हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
SSB की जिम्मेदारी केवल अवैध गतिविधियों पर नजर रखने तक सीमित नहीं है। मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों को रोकने में भी बल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में स्थानीय समुदायों के साथ मजबूत संबंध सुरक्षा तंत्र के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
गोविंद मोहन ने SSB के जवानों के योगदान और बलिदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा की मौजूदा जिम्मेदारियों को जारी रखते हुए बल को अपनी पुरानी सामुदायिक भूमिका को भी नए तरीके से मजबूत करना चाहिए।
सरकार की इस रणनीति में तकनीक आधारित निगरानी और स्थानीय लोगों के सहयोग को एक साथ जोड़ने पर जोर दिखाई दे रहा है। इससे नेपाल और भूटान की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।



