
असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। चुनावी शोर-शराबा फिलहाल थम गया है और राजनीतिक दलों ने अंतिम तैयारी पूरी कर ली है। उम्मीदवारों की घोषणाएं हो चुकी हैं और प्रचार अभियान अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस चुनाव में राज्य स्तर पर सत्ता समीकरण, जातीय और सामाजिक समीकरण, और स्थानीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाएंगे। असम में पूर्व और नए राजनीतिक गठबंधनों की लड़ाई, केरल में कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच मुकाबला, और पुडुचेरी में केंद्र सरकार समर्थित दलों की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
मतदाता सूची और पिछले चुनाव के परिणाम इस बार रणनीति बनाने में राजनीतिक दलों के लिए मार्गदर्शक साबित हो रहे हैं। 9 अप्रैल को वोटिंग समाप्त होने के बाद मतगणना और परिणाम से तीनों राज्यों में राजनीतिक परिदृश्य बदल सकता है। यह चुनाव आगामी राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालने की क्षमता रखता है।



