
हिमालय दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय संरक्षण को लेकर बड़ा ऐलान किया है। देहरादून में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने हर वर्ष ‘हिमालय विभूति सम्मान’ प्रदान करने की घोषणा की। यह सम्मान हिमालय के संरक्षण और सतत विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार हिमालय संरक्षण, संवर्धन और सतत विकास के क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हिमालयी क्षेत्रों के लिए समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्वों को इस सम्मान के लिए चुना जाएगा। सम्मान प्रत्येक वर्ष हिमालय दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाएगा।
सीएम धामी ने हिमालय परिषद में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों को बढ़ाने के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा भी की। सरकार का जोर हिमालयी क्षेत्रों में संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय उत्तराखंड की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का महत्वपूर्ण आधार है। हिमालय से निकलने वाली नदियां देश के बड़े हिस्से की जल आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। ऐसे में हिमालय का संरक्षण केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों से भी जुड़ा मुद्दा है।
जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालयी क्षेत्र कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ग्लेशियरों पर बढ़ता दबाव, जल स्रोतों का संकट, अतिवृष्टि, भूस्खलन, वनाग्नि और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं हिमालयी क्षेत्रों के लिए चिंता बढ़ा रही हैं।
सीएम धामी ने कहा कि हिमालय की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों में विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रकृति के बीच संतुलन जरूरी है। विकास की योजनाएं बनाते समय पर्यावरणीय परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा।
मुख्यमंत्री ने हिमालय संरक्षण में जनभागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हिमालय संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों और सेमिनारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जन-जन का अभियान बनाया जाना जरूरी है।
हिमालय दिवस के मौके पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े कई पोस्टरों का विमोचन भी किया गया। इनमें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल और साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग सहित विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े पोस्टर शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई पीढ़ी की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं में हिमालय, नदियों, जंगलों, स्वच्छ हवा और पानी को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना आज की बड़ी जिम्मेदारी है।
कुल मिलाकर हिमालय दिवस पर सीएम धामी की घोषणाओं को हिमालय संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ‘हिमालय विभूति सम्मान’ के जरिए संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं हिमालय परिषद के लिए एक करोड़ रुपये की घोषणा से संसाधनों को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।



