भारत-उज्बेकिस्तान बने व्यापक रणनीतिक साझेदार, 2030 तक 5 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य

मध्य एशिया में भारत ने अपनी कूटनीतिक और आर्थिक मौजूदगी को मजबूत करते हुए उज्बेकिस्तान के साथ संबंधों को नई ऊंचाई दी है। भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने मौजूदा रणनीतिक संबंधों को Comprehensive Strategic Partnership यानी व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की घोषणा की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच ताशकंद में हुई वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, डिजिटल तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह वर्तमान व्यापार स्तर से करीब पांच गुना अधिक है। इसके लिए दोनों पक्ष व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ नए क्षेत्रों में कारोबारी सहयोग मजबूत करेंगे।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऊर्जा सहयोग भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। दोनों देशों ने उज्बेकिस्तान से भारत को लंबे समय तक यूरेनियम की आपूर्ति के लिए एक ढांचा तैयार करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा दुर्लभ खनिजों और खनन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देश सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। रक्षा उत्पादन और सह-निर्माण के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक भागीदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।
दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में समझौते और सहमति पत्र भी किए हैं। इनमें खनन, आयुर्वेद, पर्यटन, आर्थिक एवं वित्तीय संवाद, उच्च शिक्षा और पर्यावरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी सामने आई हैं।
भारत के लिए उज्बेकिस्तान मध्य एशिया में एक महत्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों के साथ व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ रहा है। व्यापक रणनीतिक साझेदारी के बाद इन रिश्तों को और संस्थागत रूप देने की उम्मीद है।
नई साझेदारी के तहत दोनों देश नियमित उच्चस्तरीय संवाद और समन्वय को मजबूत करेंगे। 5 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य के साथ ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल क्षेत्र में बढ़ता सहयोग भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों को आने वाले वर्षों में और रणनीतिक महत्व दे सकता है।



