कारोबार

RBI का बड़ा फैसला, प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग पर शिकंजा; एंजल वन और BSE के स्टॉक्स टूटे

शेयर बाजार में उस समय हलचल तेज हो गई जब भारतीय रिज़र्व बैंक ने शेयर और कमोडिटी से जुड़े प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग नियमों को कड़ा करने का संकेत दिया। इस खबर का सबसे ज्यादा असर ब्रोकिंग और एक्सचेंज से जुड़ी कंपनियों पर देखने को मिला। कारोबार के दौरान BSE और Angel One जैसे प्रमुख काउंटरों में तेज बिकवाली हुई और कुछ समय के लिए इन शेयरों में 7 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि अपने खाते से ट्रेडिंग करने के नियम सख्त होते हैं, तो ब्रोकिंग कंपनियों की आय पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि उनके रेवेन्यू का एक हिस्सा इसी गतिविधि से आता है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि नियामकीय सख्ती का उद्देश्य जोखिम कम करना और ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है, लेकिन अल्पावधि में इससे ब्रोकर्स के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ना स्वाभाविक है। खबर सामने आते ही ट्रेडर्स ने तेजी से पोजीशन हल्की करनी शुरू कर दी, जिससे कीमतों में और दबाव बढ़ा। कई निवेशकों ने यह भी माना कि जब तक नियमों की पूरी रूपरेखा स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक सेक्टर में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि लंबी अवधि में पारदर्शिता बढ़ने से संगठित और मजबूत कंपनियों को फायदा भी मिल सकता है।

आरबीआई के संभावित कदमों को बाजार में जोखिम प्रबंधन की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में रिटेल भागीदारी तेजी से बढ़ी है और नियामक चाहते हैं कि संस्थाएं ग्राहकों के हितों से टकराव वाली गतिविधियों में अत्यधिक जोखिम न लें। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं। आने वाले दिनों में जब विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होंगे, तब यह साफ हो पाएगा कि वास्तविक प्रभाव कितना व्यापक होगा। फिलहाल ब्रोकिंग शेयरों में उतार-चढ़ाव तेज है और बाजार प्रतिभागी हर नई जानकारी पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

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