Share Market Closed: Sensex 325 अंक टूटा, Nifty 24,078 पर बंद

घरेलू शेयर बाजार के लिए बुधवार का कारोबारी सत्र भी कमजोर रहा। लगातार सातवें दिन बाजार लाल निशान में बंद हुआ। Sensex में करीब 0.42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि Nifty 50 करीब 0.32 प्रतिशत फिसला।
कारोबार के अंत में Sensex 76,909.68 के स्तर पर बंद हुआ। इस तरह इंडेक्स में करीब 325 अंक की गिरावट आई। वहीं Nifty 50 24,078.30 पर बंद हुआ और करीब 76 अंक टूट गया।
Nifty में लगातार सातवें कारोबारी सत्र की गिरावट ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। Reuters के अनुसार यह करीब 11 महीनों में Nifty की सबसे लंबी लगातार गिरावट वाली अवधि है। इन सात सत्रों में Nifty और Sensex दोनों करीब 2.1 प्रतिशत कमजोर हुए हैं।
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पड़ा। Brent crude करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जिससे निवेशकों में महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ी है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ईरान और अमेरिका से जुड़ी अनिश्चितता तथा Strait of Hormuz को लेकर स्थिति ने तेल बाजार में जोखिम बढ़ाया है।
बढ़ती वैश्विक बॉन्ड यील्ड ने भी शेयर बाजार की धारणा पर असर डाला। जब विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न आकर्षक होता है, तो उभरते बाजारों में जोखिम वाली परिसंपत्तियों से निवेश निकलने का दबाव बढ़ सकता है।
बुधवार को बाजार में गिरावट व्यापक रही। Reuters के मुताबिक 16 प्रमुख सेक्टरों में से 14 में गिरावट दर्ज की गई। Financial stocks भी दबाव में रहे, जबकि IT सेक्टर ने मामूली मजबूती दिखाई।
बाजार की मौजूदा कमजोरी में विदेशी संकेतों और कच्चे तेल के साथ-साथ निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमी भी अहम भूमिका निभा रही है। ऐसे माहौल में निवेशक कंपनियों के नतीजों और घरेलू आर्थिक संकेतकों के साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी नजर रख रहे हैं।
हालांकि हर सेक्टर में गिरावट नहीं रही। IT इंडेक्स करीब 0.7 प्रतिशत चढ़ा, जबकि शहरों में पाइप्ड गैस कनेक्शन बढ़ाने के लिए सरकारी प्रोत्साहन की खबरों के बाद Indraprastha Gas और Mahanagar Gas में भी तेजी देखने को मिली।
कुल मिलाकर बाजार के लिए लगातार सात दिनों की गिरावट चिंता का संकेत है। अब निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेश प्रवाह पर रहेगी। इन संकेतकों में सुधार आने पर बाजार की धारणा में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।



