Vedanta का ₹9575 करोड़ का निवेश, Net Zero लक्ष्य से आएगी Green Revolution

अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाला वेदांता ग्रुप ग्रीन एनर्जी और डिकार्बोनाइजेशन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रहा है। कंपनी का फोकस सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि अपने मेटल्स, माइनिंग और एनर्जी कारोबार के कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर भी है। वेदांता ने अपने ESG रोडमैप में 2050 या उससे पहले Net Zero Carbon हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कंपनी रिन्यूएबल पावर, ऊर्जा दक्षता और कम-कार्बन ईंधन जैसे विकल्पों पर काम कर रही है।
कंपनी के डिकार्बोनाइजेशन प्लान में रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाना एक अहम हिस्सा है। वेदांता ने करीब 10 GW रिन्यूएबल एनर्जी के Round-the-Clock इस्तेमाल की दिशा में भी लक्ष्य रखा है, जिससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। वेदांता के मुताबिक, FY24 तक कंपनी ने डिकार्बोनाइजेशन प्रोजेक्ट्स पर बड़ी राशि खर्च की थी और कई प्रोजेक्ट ऊर्जा दक्षता, लो-कार्बन फ्यूल और रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़े थे। कंपनी ने 2021 के बाद से लाखों टन CO₂e उत्सर्जन से बचने की भी जानकारी दी है।
ग्रीन एनर्जी की यह रणनीति वेदांता के अलग-अलग कारोबारों तक फैली हुई है। कंपनी के रोडमैप में EVs को अपनाने, सौर और अन्य रिन्यूएबल पावर के इस्तेमाल तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। हिंदुस्तान जिंक जैसे वेदांता समूह के कारोबार भी ग्रीन एनर्जी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कंपनी ने 2026 में ग्रीन एनर्जी सॉल्यूशंस के लिए एक समझौते की जानकारी दी और नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को दोहराया। अनिल अग्रवाल लगातार भारत की ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन क्षमता को बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। उनका मानना है कि देश को खनिज, धातु, तेल और गैस जैसे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास को साथ लेकर चलना चाहिए।
ऐसे समय में जब दुनिया भर में कंपनियां कार्बन उत्सर्जन कम करने की कोशिश कर रही हैं, वेदांता का ग्रीन ट्रांजिशन भारतीय मेटल्स और माइनिंग सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि बड़े स्तर पर नेट जीरो हासिल करना लंबी प्रक्रिया है और इसके लिए लगातार निवेश, नई तकनीक और परिचालन बदलाव की जरूरत होगी।वेदांता का लक्ष्य सिर्फ पर्यावरणीय प्रभाव कम करना नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में अपने कारोबार को बदलती ऊर्जा जरूरतों के अनुरूप तैयार करना भी है। रिन्यूएबल पावर और कम-कार्बन तकनीक में निवेश भविष्य में कंपनी की लागत और प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर भी असर डाल सकता है।
कुल मिलाकर, वेदांता का नेट जीरो रोडमैप भारत में इंडस्ट्री और ग्रीन एनर्जी के बीच बढ़ते तालमेल की तस्वीर दिखाता है। अगर कंपनी अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय पर हासिल करती है, तो इससे उसके कारोबार के साथ-साथ देश के डिकार्बोनाइजेशन प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है।



