ईरान तक भारत का सामान पहुंचाना मुश्किल, अमेरिका-यूएई के कदम से बढ़ी टेंशन

ईरान को सामान भेजने वाले भारतीय निर्यातकों के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। अमेरिका की ओर से ईरान पर नए प्रतिबंधों का दबाव बढ़ाने और यूएई द्वारा ईरान के साथ व्यापार व वित्तीय लेनदेन रोकने के फैसले से भारत के लिए ईरान तक माल पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर उन निर्यातकों पर पड़ सकता है, जो दुबई के रास्ते ईरान तक अपना सामान भेजते हैं।
भारत से ईरान को भेजे जाने वाले बासमती चावल, चाय और फार्मास्यूटिकल्स का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से दुबई के जरिए पहुंचता रहा है। अब यूएई के फैसले से इस सप्लाई चेन में बाधा आने की आशंका है। खासकर उत्तर भारत के बासमती चावल निर्यातकों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।
यूएई ने 19 अगस्त को अगले आदेश तक ईरान के साथ सभी व्यापार, वाणिज्यिक आदान-प्रदान और वित्तीय लेनदेन रोकने की घोषणा की थी। इससे दुबई का वह कारोबारी और वित्तीय रास्ता प्रभावित हुआ है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से ईरान के साथ व्यापार के लिए होता रहा है।
भारत के लिए समस्या सिर्फ माल भेजने तक सीमित नहीं है। पेमेंट, शिपिंग, इंश्योरेंस और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है। निर्यातकों को ईरान तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे डिलीवरी का समय और माल ढुलाई खर्च दोनों बढ़ने की संभावना है। कुछ भारतीय कारोबारी तुर्की जैसे वैकल्पिक मार्गों पर विचार कर रहे हैं।
भारत और ईरान के बीच व्यापार पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण काफी सीमित हो चुका है। 2025-26 में दोनों देशों का व्यापार करीब 1.63 अरब डॉलर रहा, जिसमें अधिकांश हिस्सा मानवीय जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं का था। ऐसे में नए प्रतिबंध और दुबई का रास्ता बंद होना भारतीय निर्यातकों के लिए एक और झटका साबित हो सकता है।
अब नजर इस बात पर है कि भारत अपने निर्यातकों के लिए वैकल्पिक भुगतान और लॉजिस्टिक व्यवस्था किस तरह तैयार करता है। यदि ईरान के साथ खाद्य और दवा जैसी जरूरी वस्तुओं के व्यापार को किसी तरह की छूट मिलती है, तो दबाव कुछ कम हो सकता है; लेकिन फिलहाल बढ़ी हुई लागत और सप्लाई में देरी भारतीय कारोबारियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।



