ITR भरने के बाद 6 साल तक संभालकर रखें ये दस्तावेज, वरना हो सकती है परेशानी

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद सिर्फ रिटर्न भर देना ही काफी नहीं होता, बल्कि उससे जुड़े जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। कई मामलों में आयकर विभाग पुराने रिटर्न की जांच या स्पष्टीकरण के लिए दस्तावेज मांग सकता है। इसलिए टैक्स रिकॉर्ड को लंबे समय तक संभालकर रखना करदाताओं के लिए फायदेमंद होता है।
आमतौर पर ITR से जुड़े दस्तावेजों को कम से कम 6 साल तक सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है। इनमें आय, निवेश, कटौती और टैक्स भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड शामिल होते हैं। अगर भविष्य में किसी नोटिस या जांच की स्थिति आती है तो यही दस्तावेज आपकी जानकारी को प्रमाणित करने में मदद कर सकते हैं।
ये दस्तावेज संभालकर रखें:
- ITR की कॉपी: हर साल दाखिल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी सुरक्षित रखें।
- ITR-V की रसीद: ऑनलाइन ITR वेरिफिकेशन के बाद मिलने वाली रसीद को संभालकर रखें।
- फॉर्म 16: नौकरीपेशा लोगों के लिए नियोक्ता द्वारा जारी किया गया यह दस्तावेज आय और टैक्स कटौती का प्रमाण होता है।
- फॉर्म 16A: बैंक ब्याज, कमीशन या अन्य आय पर कटे TDS से जुड़ा रिकॉर्ड।
- बैंक स्टेटमेंट: आय, ब्याज और बड़े लेनदेन की पुष्टि के लिए जरूरी हो सकता है।
- निवेश से जुड़े दस्तावेज: म्यूचुअल फंड, शेयर, बीमा, पीपीएफ, एफडी और अन्य निवेश के प्रमाण।
- लोन और ब्याज प्रमाण पत्र: होम लोन या अन्य ऋण पर मिलने वाली टैक्स छूट के लिए जरूरी दस्तावेज।
- टैक्स भुगतान की रसीदें: एडवांस टैक्स, सेल्फ असेसमेंट टैक्स आदि के भुगतान प्रमाण।
टैक्स रिकॉर्ड को डिजिटल और फिजिकल दोनों रूपों में सुरक्षित रखना बेहतर होता है। दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से रखने से भविष्य में आयकर विभाग से संबंधित किसी भी प्रक्रिया के दौरान परेशानी कम हो सकती है। करदाताओं को अपनी आय, निवेश और कटौती से जुड़े सभी प्रमाणों को रिटर्न में किए गए दावों के अनुरूप सुरक्षित रखना चाहिए।



