जानिए किस हलवाई ने बनाया था पहला डिब्बाबंद रसगुल्ला, 95 साल पुराना है ये स्वादिष्ट इतिहास

रसगुल्ला — यह नाम सुनते ही मुंह में मिठास घुल जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में पहली बार डिब्बाबंद रसगुल्ला (Canned Rasgulla) बनाने का कारनामा करीब 95 साल पहले एक बंगाली हलवाई ने किया था? यह मिठाई सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि भारतीय नवाचार की एक मिसाल भी है।
कहानी है कोलकाता के प्रसिद्ध हलवाई केसी दास (K.C. Das) की, जिन्होंने 1930 के दशक में पहली बार रसगुल्ले को डिब्बे में पैक करने का अनोखा प्रयोग किया। उनके पिता नोबिन चंद्र दास को रसगुल्ले का जनक कहा जाता है, जिन्होंने 1868 में इस मिठाई का आविष्कार किया था। वहीं, उनके बेटे केसी दास ने इसे तकनीकी रूप से लंबे समय तक सुरक्षित रखने की विधि विकसित की, जिससे रसगुल्ला टिन के डिब्बों में महीनों तक ताजा रह सके।
यह प्रयोग उस दौर में एक क्रांतिकारी कदम था, क्योंकि मिठाइयां आम तौर पर जल्दी खराब हो जाती थीं। डिब्बाबंद रसगुल्ले की वजह से भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बंगाली मिठाई की मिठास फैलने लगी। जल्द ही केसी दास प्राइवेट लिमिटेड ने अपने “K.C. Das Rasgulla” ब्रांड को देशभर में लोकप्रिय बना दिया।
आज 95 साल बाद भी यह ब्रांड अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। बाजार में अब दर्जनों कंपनियां डिब्बाबंद रसगुल्ले बेचती हैं, लेकिन केसी दास का नाम इस परंपरा की शुरुआत के लिए हमेशा याद किया जाता है।
कीमत की बात करें तो आज के समय में 1 किलोग्राम डिब्बाबंद रसगुल्ला की कीमत ₹150 से ₹250 तक होती है, जो ब्रांड और पैकेजिंग पर निर्भर करती है। वहीं, केसी दास का ओरिजिनल रसगुल्ला थोड़ा महंगा होता है, क्योंकि उसमें पारंपरिक विधि और शुद्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
रसगुल्ले की यह कहानी सिर्फ मिठास की नहीं, बल्कि भारत की स्वदेशी सोच और नवाचार की गाथा भी है, जिसने भारतीय मिठाइयों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।



