ग्रीन पटाखों का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र कहां है? सालाना कारोबार जानकर रह जाएंगे दंग

दीपावली का त्योहार रोशनी और खुशियों का प्रतीक माना जाता है, लेकिन प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए अब पारंपरिक पटाखों की जगह ग्रीन पटाखों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इन ग्रीन पटाखों का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र तमिलनाडु के सिवाकासी (Sivakasi) में स्थित है। सिवाकासी को देश का ‘फायरवर्क्स कैपिटल ऑफ इंडिया’ कहा जाता है, जहां से देशभर में 80% से अधिक ग्रीन पटाखों की आपूर्ति की जाती है।
सिवाकासी में लगभग 1000 से अधिक छोटे-बड़े कारखाने ग्रीन पटाखों के निर्माण में जुटे हैं। यहां सालाना कारोबार की बात करें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं — रिपोर्टों के मुताबिक सालाना करीब 6,000 से 7,000 करोड़ रुपये का कारोबार ग्रीन पटाखों के जरिए होता है। इन पटाखों की मांग दीपावली, क्रिसमस, नववर्ष और शादियों के मौसम में चरम पर होती है।
ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30% तक कम प्रदूषण फैलाते हैं, क्योंकि इनमें बेरियम नाइट्रेट (Barium Nitrate) और अन्य हानिकारक रसायनों की जगह पोटेशियम नाइट्रेट, एलुमिनियम और सल्फर का सीमित उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, इनमें कार्बन उत्सर्जन भी बेहद कम होता है, जिससे वातावरण को कम नुकसान पहुंचता है।
सिवाकासी के उद्योगों ने CSIR-NEERI (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च – नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) की मदद से ग्रीन पटाखों के कई नए फॉर्मुले विकसित किए हैं। इन फॉर्मूलों को भारत सरकार की मंजूरी भी प्राप्त है।
हालांकि, कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और सुरक्षा नियमों के कड़े होने से उद्योग को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, सिवाकासी के कारीगरों ने नवाचार और पर्यावरण संतुलन के बीच बेहतरीन संतुलन बनाकर इस उद्योग को जीवित रखा है।
आज ग्रीन पटाखों का उत्पादन न केवल भारत में, बल्कि विदेशी बाजारों में भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे यह उद्योग आने वाले वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।



