SBI ATM Fraud: ₹80,000 की निकासी पर बैंक को ₹1.30 लाख लौटाने का आदेश

ATM फ्रॉड से जुड़े एक मामले में SBI को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंक की अपील खारिज करते हुए ग्राहक को ₹1.30 लाख लौटाने का आदेश बरकरार रखा है। मामला अक्टूबर 2018 का है, जब ग्राहक के खाते से बिना अनुमति के ATM और बैंक ट्रांसफर के जरिए रकम निकाली गई थी।
मामले में ग्राहक के खाते से चार ATM निकासी के जरिए ₹80,000 निकाले गए थे। इसके बाद ₹40,000 और ₹10,000 के दो और ट्रांसफर भी हुए। ग्राहक ने इन सभी लेनदेन से इनकार करते हुए SBI में शिकायत दर्ज कराई और संबंधित ATM की CCTV फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की थी।
कंज्यूमर कमीशन के सामने SBI विवादित ATM ट्रांजैक्शन की CCTV फुटेज, ATM जर्नल, स्विच रिकॉर्ड और ऑथेंटिकेशन से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं कर पाया। आयोग ने माना कि इन रिकॉर्ड का संरक्षक बैंक ही था और वह यह साबित करने में विफल रहा कि विवादित लेनदेन ग्राहक ने खुद किए थे।
आयोग ने यह भी माना कि ग्राहक की शिकायतों पर बैंक ने पर्याप्त जांच नहीं की। CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं कराने और अनधिकृत लेनदेन को लेकर जरूरी सबूत पेश न करने को बैंक की सेवा में कमी माना गया।
इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने पहले ही SBI को ग्राहक को ₹1.30 लाख देने का आदेश दिया था। इसमें मूल रकम के साथ मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च से जुड़ी राशि भी शामिल थी। SBI ने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन राज्य आयोग ने उसे खारिज कर दिया।
राज्य आयोग के आदेश के अनुसार SBI को ₹1.30 लाख पर 12 अक्टूबर 2018 से 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। यदि आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो ब्याज दर 8 प्रतिशत सालाना हो जाएगी।
यह फैसला बैंक ग्राहकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अनधिकृत डिजिटल या ATM लेनदेन के मामले में बैंक को अपने पास मौजूद जरूरी रिकॉर्ड के आधार पर यह स्पष्ट करना पड़ सकता है कि लेनदेन कैसे हुआ और क्या वह वास्तव में ग्राहक द्वारा अधिकृत था।



