25 की उम्र में ₹65 हजार, 60 के बाद ₹1.77 लाख तक पहुंचा इलाज का खर्च; मुंबई सबसे महंगा

उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ने के अलावा इलाज की लागत भी तेजी से बढ़ती है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि युवा उम्र की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों के अस्पताल संबंधी दावों की औसत राशि काफी अधिक है। इसके साथ ही भारत में मेडिकल इंफ्लेशन सामान्य महंगाई से काफी ऊपर बना हुआ है, जिससे पुरानी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का कवर समय के साथ अपर्याप्त हो सकता है।
25 साल की उम्र में ₹65 हजार का औसत क्लेम
रिपोर्ट के मुताबिक 25 वर्ष की उम्र में औसत हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम करीब ₹65,000 रहा। युवा लोगों में अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में गंभीर बीमारियों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम हो सकती है, जिससे औसत क्लेम राशि भी कम रहती है।
60 के बाद ₹1.77 लाख तक पहुंचा खर्च
60 वर्ष से अधिक आयु में औसत क्लेम करीब ₹1.77 लाख तक पहुंच गया। उम्र बढ़ने के साथ गंभीर बीमारियों और लंबे इलाज की संभावना बढ़ने से अस्पताल का बिल भी बढ़ सकता है।
यह औसत आंकड़ा है—किसी व्यक्ति का वास्तविक इलाज खर्च बीमारी, अस्पताल, उपचार की अवधि और शहर के अनुसार इससे काफी कम या अधिक हो सकता है।
मुंबई में इलाज सबसे महंगा
महानगरों में अस्पताल और मेडिकल सुविधाओं की लागत छोटे शहरों के मुकाबले अधिक होती है। उपलब्ध रिपोर्ट में मुंबई को सबसे महंगे शहर के रूप में रेखांकित किया गया है। दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे अन्य बड़े शहरों में भी निजी अस्पतालों की लागत ऊंची हो सकती है।
मेडिकल इंफ्लेशन बढ़ा रहा है बोझ
भारत में मेडिकल इंफ्लेशन के अनुमान करीब 12-14% सालाना बताए जा रहे हैं। इसका मतलब है कि कुछ वर्षों में समान उपचार के लिए आज की तुलना में काफी अधिक रकम खर्च करनी पड़ सकती है।
मसलन, 2024 में ACKO के claims analysis में औसत hospitalisation claim ₹70,558 था, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹62,548 से 12.8% अधिक था। इसी रिपोर्ट में healthcare inflation करीब 14% बताया गया था।
पुरानी हेल्थ पॉलिसी क्यों पड़ सकती है छोटी?
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने कई साल पहले ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा लिया था। महंगाई बढ़ने के साथ उसकी नाममात्र बीमा राशि ₹5 लाख ही रहेगी, लेकिन उतनी रकम में मिलने वाला इलाज कम हो जाएगा। इसी वजह से विशेषज्ञ समय-समय पर sum insured की समीक्षा करने की सलाह देते हैं।
खासकर मेट्रो शहर में गंभीर बीमारी, सर्जरी या लंबे ICU उपचार का खर्च कई लाख रुपये तक पहुंच सकता है। कुछ विशेषज्ञ ऐसे शहरों में ₹10 लाख के बजाय ₹20 लाख या उससे अधिक के बेस कवर और जरूरत के अनुसार super top-up पर विचार करने की सलाह देते हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय किन बातों पर ध्यान दें?
- केवल प्रीमियम कम होने के आधार पर पॉलिसी न चुनें।
- Sum insured को भविष्य की मेडिकल महंगाई को ध्यान में रखकर तय करें।
- Room-rent limit और disease/procedure-specific sub-limits जांचें।
- Co-payment और deductible की शर्त समझें।
- अपने शहर में cashless network hospitals की उपलब्धता देखें।
- उम्र बढ़ने के साथ कवर की पर्याप्तता की समीक्षा करते रहें।
- जरूरत पड़ने पर super top-up से अतिरिक्त सुरक्षा पर विचार करें।
निष्कर्ष: 25 साल में करीब ₹65 हजार से 60+ उम्र में ₹1.77 लाख तक पहुंचा औसत क्लेम यह दिखाता है कि उम्र के साथ स्वास्थ्य खर्च का वित्तीय जोखिम काफी बढ़ सकता है। वहीं 12-14% के आसपास मेडिकल इंफ्लेशन पुरानी बीमा राशि को समय के साथ कमजोर कर सकती है। इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस को केवल आज की जरूरत के हिसाब से नहीं, बल्कि भविष्य के इलाज खर्च और अपनी उम्र के साथ बढ़ते जोखिम को ध्यान में रखकर देखना जरूरी है।



