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ला-नीना इफेक्ट 2025: इस साल बढ़ेगी ठंड, जानें सर्दी का असर मन, नींद और एनर्जी पर

इस साल भारत में ठंड सामान्य से ज्यादा पड़ने के आसार हैं और इसका मुख्य कारण माना जा रहा है ला-नीना (La Niña) इफेक्ट। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर में समुद्री तापमान सामान्य से कम होने की वजह से यह प्रभाव बनता है, जिससे उत्तरी गोलार्ध में ठंडक बढ़ जाती है। भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों में इसका असर दिसंबर से फरवरी के बीच स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

ला-नीना के कारण न सिर्फ तापमान में गिरावट आती है बल्कि मौसम में अस्थिरता भी बढ़ती है। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी सामान्य से अधिक हो सकती है और मैदानों में शीतलहरें पहले से लंबी चल सकती हैं। इसका सीधा असर लोगों के मूड, नींद और ऊर्जा स्तर पर भी पड़ेगा। सर्दी के मौसम में दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं, जिससे सूरज की रोशनी कम मिलने के कारण शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर घटता है। यह हार्मोन मूड को नियंत्रित करता है, इसलिए कई लोग सर्दी में उदासी या सुस्ती महसूस करते हैं।

सर्दी में शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock) भी प्रभावित होती है, जिससे नींद का पैटर्न बिगड़ सकता है। ठंड बढ़ने पर लोग देर से उठते हैं और नींद पूरी होने के बावजूद थकान महसूस करते हैं। वहीं, कम धूप और ठंडी हवाओं के कारण विटामिन-डी की कमी भी देखने को मिलती है, जिससे शरीर की एनर्जी घटने लगती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में खानपान और रूटीन में बदलाव करके इन प्रभावों को कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, सुबह की धूप, गर्म तरल पदार्थों का सेवन और संतुलित आहार मन और शरीर दोनों को सक्रिय रखता है। ला-नीना के इस साल पड़ने वाले असर से जहां मौसम सुहावना तो होगा, वहीं स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी रहेगा।

इसलिए, आने वाले महीनों में ठंड के लिए तैयार रहें—क्योंकि यह केवल तापमान ही नहीं गिराएगी, बल्कि आपकी नींद, मूड और ऊर्जा को भी चुनौती दे सकती है।

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