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PM2.5 और डायबिटीज का कनेक्शन: कैसे बढ़ता है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा?

बढ़ता एयर पॉल्यूशन आज केवल सांस से जुड़ी बीमारियों का कारण नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर और दीर्घकालिक रोगों का खतरा भी बढ़ा रहा है। हाल के वर्षों में किए गए वैज्ञानिक अध्ययनों ने इस बात की पुष्टि की है कि PM2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कण टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को भी काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। स्मॉग, जो सर्दियों में खासकर दिल्ली-NCR जैसे शहरों में छाया रहता है, शरीर के ब्लड शुगर लेवल पर सीधा असर डाल सकता है। लेकिन यह कैसे होता है? आइए इस कनेक्शन को सरल भाषा में समझते हैं।

PM2.5 वे बहुत छोटे कण होते हैं जो 2.5 माइक्रोन से भी कम आकार के होते हैं। ये कण सांस के साथ फेफड़ों में पहुंचते ही ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश कर सकते हैं। एक बार जब ये bloodstream में पहुंच जाते हैं, तो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन बढ़ाने लगते हैं। यही इंफ्लेमेशन इंसुलिन की कार्यक्षमता को कम कर देता है, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं—टाइप-2 डायबिटीज की सबसे पहली और प्रमुख वजह।

स्मॉग भरे वातावरण में लंबे समय तक रहने से शरीर में सूजन की मात्रा लगातार बढ़ती रहती है। इससे कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रहतीं और धीरे-धीरे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। यही कारण है कि प्रदूषण वाले शहरों में रहने वाले लोगों में डायबिटीज की दर अधिक देखी जाती है।

एक अन्य कारण यह है कि प्रदूषण हृदय और फेफड़ों के अलावा हार्मोनल संतुलन को भी प्रभावित करता है। इससे मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और शरीर ग्लूकोज को सही तरह से प्रोसेस नहीं कर पाता। जो लोग पहले से प्रीडायबिटिक हैं, उनमें तो यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।

चिकित्सकों का कहना है कि PM2.5 का प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन यह शरीर में स्थायी बदलाव ला सकता है। प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कई लोगों में टाइप-2 डायबिटीज धीरे-धीरे विकसित हो जाता है, भले ही वे स्वस्थ जीवनशैली जी रहे हों।

इस बढ़ते खतरे से बचने के लिए जरूरी है कि लोग मास्क का उपयोग करें, high-pollution days में बाहर कम निकलें, घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और स्वस्थ खान-पान व नियमित व्यायाम अपनाएं। स्मॉग के मौसम में डायबिटीज रोगियों को ब्लड शुगर की नियमित जांच करने की सलाह दी जाती है।

कुल मिलाकर, PM2.5 केवल हवा की गुणवत्ता को खराब नहीं करता बल्कि यह शरीर के अंदरूनी सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा कर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए प्रदूषण से बचाव आज स्वास्थ्य की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।

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