Keto Diet के साइड इफेक्ट: तेजी से वजन घटाने के चक्कर में फैटी लिवर की आशंका, रिसर्च में दावा

आजकल तेजी से वजन घटाने के लिए केटो डाइट (Keto Diet) का चलन काफी बढ़ गया है, लेकिन हालिया रिसर्च और विशेषज्ञों की राय इसके साइड इफेक्ट्स को लेकर चिंता बढ़ा रही है। केटो डाइट में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बेहद कम और फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिससे शरीर ऊर्जा के लिए फैट को जलाने लगता है। इसी प्रक्रिया को कीटोसिस कहा जाता है। शुरुआत में वजन तेजी से घटता जरूर है, लेकिन लंबे समय तक इस डाइट को अपनाने से लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। रिसर्च में दावा किया गया है कि अत्यधिक फैट का सेवन फैटी लिवर डिजीज (Fatty Liver Disease) की आशंका बढ़ा सकता है, खासकर उन लोगों में जो पहले से मोटापा, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। फैटी लिवर की स्थिति में लिवर में चर्बी जमा होने लगती है, जिससे समय के साथ सूजन, लिवर एंजाइम का बढ़ना और गंभीर मामलों में लिवर डैमेज तक हो सकता है। इसके अलावा केटो डाइट से कब्ज, थकान, सिरदर्द, मुंह से बदबू, पोषक तत्वों की कमी और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वजन घटाने की जल्दबाजी में संतुलित आहार को नजरअंदाज करना भविष्य में सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासतौर पर लंबे समय तक केटो डाइट लेने से फाइबर, विटामिन और मिनरल्स की कमी हो सकती है, जो पाचन और इम्यून सिस्टम को कमजोर करती है। रिसर्च यह भी संकेत देती है कि बिना मेडिकल सलाह के केटो डाइट अपनाना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि हर व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। डॉक्टर और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि वजन घटाने के लिए संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और जीवनशैली में सुधार ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ तरीका है। अगर कोई व्यक्ति केटो डाइट अपनाना चाहता है, तो उसे पहले लिवर फंक्शन, ब्लड प्रोफाइल और अन्य स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। कुल मिलाकर, केटो डाइट से वजन कम जरूर हो सकता है, लेकिन इसके संभावित साइड इफेक्ट्स, खासकर फैटी लिवर के खतरे को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।



