
देश में हाईवे और एक्सप्रेसवे निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने निगरानी व्यवस्था और मजबूत करने का फैसला किया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय करीब 5000 किलोमीटर हाईवे और एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य की थर्ड-पार्टी एजेंसी से जांच कराएगा। इसका उद्देश्य निर्माण की गुणवत्ता, मानकों के पालन और परियोजनाओं की मजबूती पर स्वतंत्र नजर रखना है।
थर्ड-पार्टी निरीक्षण एजेंसी निर्माण कार्य शुरू होने से लेकर परियोजना के पूरा होने तक विभिन्न चरणों में जांच करेगी। इससे सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, तकनीकी मानकों और निर्धारित गुणवत्ता प्रक्रियाओं की निगरानी की जा सकेगी।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में निर्माण संबंधी कमियों और समय से पहले सड़क खराब होने की चिंताएं सामने आई हैं। स्वतंत्र जांच व्यवस्था के जरिए ऐसी खामियों की पहचान शुरुआती चरण में करने की कोशिश होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक करीब 5000 किलोमीटर के सड़क नेटवर्क को इस निगरानी के दायरे में रखा गया है। इसमें लगभग 770 किलोमीटर एक्सप्रेसवे, 2200 किलोमीटर छह लेन वाले हाईवे और करीब 1000-1000 किलोमीटर चार लेन तथा दो लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं।
थर्ड-पार्टी एजेंसी का काम केवल सड़क तैयार होने के बाद निरीक्षण करना नहीं होगा। निर्माण के अलग-अलग चरणों में गुणवत्ता की जांच की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की कमी मिलने पर समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।
सरकार की कोशिश है कि सड़क परियोजनाओं में गुणवत्ता और टिकाऊपन को निर्माण की गति जितनी ही प्राथमिकता मिले। इससे भविष्य में सड़कों के जल्दी खराब होने, मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च और यात्रियों को होने वाली परेशानी को कम करने में मदद मिल सकती है।
इस व्यवस्था के तहत स्वतंत्र विशेषज्ञों की रिपोर्ट परियोजना की गुणवत्ता को लेकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। निर्माण एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों के लिए भी गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना ज्यादा जरूरी होगा।
थर्ड-पार्टी निरीक्षण की शुरुआती अवधि तीन वर्ष रखी गई है। इस दौरान चयनित हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाएगी।
सड़क परिवहन मंत्रालय के इस कदम को देश में तेजी से बढ़ रहे हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का फोकस अब केवल नई सड़कें बनाने पर नहीं, बल्कि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ बनाए रखने पर भी है।



